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जब दुनिया के सबसे धनवान आदमी का अहंकार तोड़ा गणेश जी ने

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भगवान गणेश बुद्घि और ज्ञान के दाता माने जाते हैं क्योंकि इन्होंने हमेशा से ही अपनी बुद्घि का प्रयोग करके बड़े से बड़े संकट का हल निकाला है। अपनी बौद्घिक योग्यता के कारण ही गणेश प्रथम पूज्य भी बने और संसार के सबसे धनी माने जाने वाले कुबेर को माफी मांगने के लिए विवश कर दिया।
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कुबेर के विषय में कथा यह है कि एक बार कुबेर अपने धन के भंडार को देखकर इतराने लगे। उन्होंने सोचा कि मैं इतना धनवान हूं यह लोगों को भी पता चलना चाहिए। इसके लिए कुबेर महाराज ने एक भव्य भोज का आयोजन किया।

कुबेर ने सोचा कि भगवान शिव मेरे आराध्य देवता हैं अगर वह इस भोज में आ जाएं तो मेरा मान और बढ़ जाएगा। यही सोचकर कुबेर कैलाश पहुंच गए।
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तब गणेश जी ने दिखाया चमत्कार

कुबेर ने भगवान शिव और देवी पार्वती को प्रणाम करके उन्हें भोज में शामिल होने के लिए कहा। भगवान शिव कुबेर के मनोभाव को समझ गए और कुबेर के अहंकार को दूर करने की योजना बना ली। शिव जी ने कहा कि मैं तो भोज में शामिल नहीं हो पाऊंगा लेकिन मेरे छोटे पुत्र गणेश जी जरूर आएंगे।

भगवान गणेश नियत समय पर कुबेर के भोज में पहुंच गए। गणेश जी ने आते ही कहा कि मुझे तेज भूख लगी है जल्दी प्रबंध करो। कुबेर ने अपने धन का प्रदर्शन करने के लिए गणेश जी को सोने की थाल में भोजन परोस कर दिया। गणेश जी ने झट से भोजन खत्म कर दिया और भोजन की मांग करने लगे। इस तरह कुबेर भोजन परोसते जाते और गणेश जी तुरंत समाप्त कर देते।

हजारों लोगों के लिए बना भोजन गणेश जी ने खा लिया इसके बाद भी गणेश जी का पेट नहीं भरा। गणेश जी कुबेर की रसोई में पहुंच गए और जो कुछ भी रसोई में था उसे भी खा गए। इसके बाद जब गणेश जी ने कुबेर से और भोजन मांगा तो कुबेर क्षमा मांगने लगे। गणेश जी ने कहा जब तुम्हारे पास भोजन का प्रबंध नहीं था तब भोज के लिए बुलाया क्यों। कुबेर अपने व्यवहार पर लज्जित हुआ और उनका अहंकार चकनाचूर हो गया।

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