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इन चार महीनों में भगवान विष्णु की पूजा का है ऐसा है नियम

Sun, 06 Jul 2014 07:32 AM IST
पण्डित जयगोविंद शास्त्री
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ऋषियों, मुनियों, योगियों, यक्षों, देवताओं आदि की तपस्या का पावन पर्व 'चातुर्मास्य' आषाढ़ शुक्ल एकादशी 9 जुलाई शुरु हो रहा है। देवप्रबोधिनी (कार्तिक शुक्ल) एकादशी तक विष्णु के योगनिद्रा में रहने तक यह पर्व चातुर्मास चलेगा। इस अवधि में देव शक्तियां क्षीण होती जाती हैं।
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मनुष्य को यह याद रखना चाहिए कि यह व्रत संन्यासियों और विरक्तों के लिए ही नहीं, गृहस्थजनों के लिए भी है। इन चार महीनों में घर या मंदिर में मूर्ति आदि की प्राणप्रतिष्ठा नहीं होती है। विवाह और यज्ञोपवीत संस्कार भी नहीं किए जाते।

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चातुर्मास शुरु होने पर श्रद्धालु अपने घर में चतुर्भुज श्रीविष्णु की पीतांबर पहनी प्रतिमा स्थापित करें।  उसे शुद्ध एवं सुंदर पलंग पर स्थापित करें। जिसके ऊपर सफेद चादर बिछी हो और तकिया रखी हो।
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फिर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, शर्करा, लावा और गंगाजल से स्नान कराकर  गोपी चन्दन का लेप करें पुनः गंगा जल से स्नान कराकर गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, पुष्प, सुगन्धित पदार्थों से श्रृंगार करें। इस प्रकार श्रीहरि की पूजा करके इस मंत्र से प्रार्थना करें।

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जगन्नाथ ! आपके सो जानेपर यह सारा जगत् सो जाता है तथा आपके जागृत होने पर सम्पूर्ण चराचर जगत जग उठता है। इस प्रकार भगवान विष्णु की प्रार्थना करे और ॐ नमो नारायण' का जप ध्यान, मंत्र पूजन करें।
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