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Chaitra Purnima 2020: नव संवत्सर की पहली पूर्णिमा आज, जानें व्रत विधि, पूजा मुहूर्त और महत्व

Wed, 08 Apr 2020 03:51 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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चैत्र पूर्णिमा 2020
चैत्र पूर्णिमा (Chaitra Purnima 2020) 8 अप्रैल यानी आज है। नव संवत्सर की यह पहली पूर्णिमा होती है। चैत्र पूर्णिमा को चैत पूनम या मधु पूर्णम के नाम से जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान का बड़ा महत्व है। आज के दिन उपवास रखा जाता है, सूर्य भगवान को जल चढ़ाया जाता है, दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा का विधान है।
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चैत्र पूर्णिमा मुहूर्त
चैत्र पूर्णिमा 2020 व्रत मुहूर्त (Chaitra Purnima 2020 muhurat time and date)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ अप्रैल 7, 2020 को 12:02:47 बजे 
पूर्णिमा समाप्त अप्रैल 8, 2020 को 08:06:17 बजे
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
चैत्र पूर्णिमा 2020 व्रत विधि
  • चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।
  • पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें।
  • स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
  • स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।
  • अंत में दान-दक्षिणा दें।

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पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पूर्णिमा के दिन इन वस्तुओं का करें दान
दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि दान केवल जरुरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। 
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हनुमान जयंती 2020
चैत्र पूर्णिमा के दिन होती है हनुमान जयंती
चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव होता है। इसलिए प्रति वर्ष इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी भगवान शिव के अवतार हैं और चैत्र माह में पूर्णिमा तिथि के दिन मां अंजनी की कोख से हनुमान जी का जन्म हुआ था।
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चैत्र पूर्णिमा 2020 - फोटो : Pixabay
चैत्र पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के मन और शरीर पर पड़ता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और द्रव्य पदार्थों का कारक माना जाता है। क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है। इसलिए आज के दिन व्यक्ति के मन पर पूर्णिमा का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। वहीं मनुष्य के शरीर में लगभग 80 फीसदी द्रव्य पदार्थ है। अतः पूर्णिमा को चंद्र ग्रह की पूजा का विधान है, ताकि मन और शरीर पर चंद्रमा का शुभ प्रभाव पड़े। 
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