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नवरात्रि में क्यों नहीं खाते हैं लहसुन-प्याज, आइए जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Thu, 08 Apr 2021 02:03 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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चैत्र नवरात्रि 2021
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हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व माना जाता है। एक वर्ष में दो बार कार्तिक और चैत्र मास में नवरात्रि का त्योहार पड़ता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से आरंभ होने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि या बासंतिक नवरात्रि कहा जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल 2021 से आरंभ होंगी और नवरात्रि का समापन 21 अप्रैल 2021 को होगा। इन नौ दिनों तक मां भवानी के नौ स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान पूरी तरह से सात्विक भोजन किया जाता है। जो लोग व्रत करते हैं वे तो केवल फलाहार ही करते हैं। इसके अलावा जो लोग व्रत नहीं करते उनके लिए भी किसी भी तरह से मांस मदिरा का सेवन करना निषिद्ध माना गया है। यहां तक की नवरात्रि के दौरान भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी वर्जित माना गया है। लोगों के मन में प्रश्न उठता है कि लहसुन प्याज तो सब्जी हैं फिर भी उन्हें नवरात्रि के दौरान निषिद्ध क्यों माना जाता है। जानिए इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण।

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : navratri
नवरात्रि में लहसुन प्याज न खाने के पीछे धार्मिक कारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के 9 दिन माता की भक्ति और संयम रखने का समय होता है। इसके लिए साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ताकि उसका मन विचलित न हो। प्याज और लहसुन खाने के शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे मन में कई प्रकार की इच्छाओं का जन्म होता है। इसके अलावा व्रत के समय दिन में सोने को वर्जित माना गया है। यह भोजन शरीर में सुस्ती भी बढ़ाता है। यही कारण है नवरात्रि के 9 दिनों में प्याज और लहसुन नहीं खाया जाता है।
 
पौराणिक कथा के अनुसार जब समुंद्र मंथन से अमृत प्राप्त हुआ तो मोहिनी रूप धारण करे हुए भगवान विष्णु जब देवताओं में बांट रहे थे तभी स्वर्भानु नाम का एक राक्षस देव रूप धारण करके देवताओं की पंक्ति में बैठ गया और धोखे से अमृत का सेवन कर लिया था। तभी सूर्य और चंद्रमा ने उसे देख लिया और यह बात विष्णु जी को बता दी। भगवान विष्णु को जैसे ही यह मालूम हुआ तो उन्होंने क्रोध में असुर का सर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन तब तक राक्षस के मुख में गले तक अमृत पहुंच चुका था इसलिए उसका धड़ और सिर अलग होने पर भी वह जीवित रहा जब विष्णु जी ने राक्षस का सिर धड़ से अलग किया तो मृत की कुछ बूंदें जमीन पर गिर गईं जिनसे प्याज और लहसुन उपजे। प्याज और लहसुन अमृत की बूंदों से उपजे होने के कारण यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और रोगों को नष्ट करने में सहायक होते हैं लेकिन इनमें मिला अमृत राक्षसों के मुख से होकर गिरा हैं, इसलिए इनमें तेज गंध है। यही वजह है कि राक्षस के मुख से गिरे होने के कारण इन्हें अपवित्र माना जाता है और देवी देवताओं के भोग में इस्तेमाल नहीं किया जाता।
 

चैत्र नवरात्रि 2021
प्याज लहसुन के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद
आयुर्वेद के अनुसार भोजन को तीन भागों में बांटा गया है। इसमें राजसिक भोजन, तामसिक भोजन और सात्विक भोजन आता है। प्याज और लहसुन दोनों ही फायदेमंद मानें गए हैं लेकिन प्याज को तामसिक और लहसुन को राजसिक श्रेणी में रखा गया है। उपवास के दौरान सात्विक आहार लिया जाता है इसलिए नवरात्रि के दिनों में प्याज लहसुन शामिल नहीं करते हैं। इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी माना गया है।
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नवरात्रि में प्याज और लहसुन न खाने का वैज्ञानिक आधार
चैत्र और कार्तिक दोनों ही नवरात्रि के समय मौसम में बदलाव हो रहे होते हैं, क्योंकि शारदीय नवरात्रि सितंबर-अक्टूबर में आती हैं, इस समय ठंड की ऋतु में परिवर्तन होता सर्दी बढ़ने लगती है। इसी तरह चैत्र नवरात्रि के समय सर्दी के मौसम से गर्मी के मौसम में बदलाव होता है। मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से शरीर की इम्यूनिटी कम हो जाती है। ऐसे में गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार भोजन करना सही नहीं होता है। यह आसानी से पचता नहीं है तो वहीं सादा-सात्विक भोजन आसानी से पच जाता है।
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