चैत्र नवरात्र: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा
मां चंद्रघंटा के ललाट पर अर्धचंद्र के आकार का घंटा होने के कारण इन्हे चंद्रघंटा कहा जाता है। इस दिन साधक का मन मणि पूर्ण चक्र में प्रविष्ट होता है। इस दिन देवी की कृपा पाने और मनोकामना की पूर्ति के लिए छोटी-छोटी ग्यारह घंटियां या एक घंटा चढ़ाएं एवं उसे बजाएं। माता की विशेष कृपा पाने के लिए इसे नियमित रूप से या फिर 21 दिन तक पूजा के दौरान बजाएं। माता के इस विशेष उपाय से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होगी और सम्पूर्ण वातावरण शुद्ध हो जायेगा। मां चंद्रघंटा के घंटे के ध्वनि अपने भक्तों की भूत प्रेतादि से रक्षा करती है।
चैत्र नवरात्र: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा
मां दुर्गा के इस स्वरुप की कथा भी भगवान भोलेनाथ से ही सम्बंधित है। जब भगवान भोलेनाथ देवी सती से विवाह रचाने हेतु बारात लेकर आये तो वह अपने औघड़ रूप में, तन विभूति से रमा हुआ, सर्पों की माला, बड़ी-बड़ी जटायें, भूत - प्रेत आदि साथ लेकर आये थे। उनके इस रूप को देखकर देवी सती की मां भयभीत हो मूर्छित हो गयीं और सभी डरने लगे। तब देवी सती ने भगवान शिव से उनके निर्मल रूप में आने अनुरोध किया। भगवान शिव के देवी सती के इस अनुरोध को न स्वीकारने के कारण देवी जगदम्बा ने क्रोधित होकर चन्द्रघण्टा का रूप लिया और उनके घंटे की ध्वनि सम्पूर्ण वातावरण में जो गूंज उठी, उस निर्मल और शीतल ध्वनि से सम्पूर्ण वातावरण सुगम हो गया। तत्पश्चात भगवान शिव अपने सहज रूप में आये और विवाह संपन्न किया।
चैत्र नवरात्र: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा