प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से बसंत नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं जो नौ दिनों तक चलते हैं। नवरात्रि में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना की जाती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। चैत्र नवरात्रि से ही नया हिंदू नववर्ष आरंभ हो जाता है। चैत्र का महीना हिंदू नववर्ष का पहला महीना माना जाता है। आइए जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि में क्या खास रहने वाला होगा।
- चैत्र नवरात्रि के साथ ही नया विक्रम संवत 2077 आरंभ हो जाएगा।
- नए विक्रम संवत 2077 का नाम प्रमादी रहेगा।
- इस प्रमादी विक्रम संवत 2077 के राजा बुध और मंत्री चंद्रमा होंगे।
- चैत्र नवरात्रि पर गुड़ी पड़वा और झूलेलाल जयंती भी मनाई जाएगी।
- चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा।
- इस नवरात्रि में एक विशेष संयोग भी बनने जा रहा है जब गुरु, मंगल और शनि का योग बनेगा, जिसमें ये तीनों ग्रह मकर राशि में एक साथ रहेंगे।
नव संवत्सर विक्रम संवत 2077
वर्तमान में परिधावी नामक संवत्सर विदा हो रहा है और 'प्रमादी' नामक संवत्सर का शुभारंभ होने वाला है जिसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। जिसके फलस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार के लिए कठिन तो रहेगा, किंतु भारत सरकार इसमें पूर्ण तरह सफल रहेगी। 6 अप्रैल से 'आनंद' नामक संवत्सर का भी शुभारंभ हो जाएगा जो भारतवर्ष की समृद्धि के लिए शुभ साबित होगा। नववर्ष का आरंभ बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र, और मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर के समय में हो रहा है अतः देश के लिए यह संयोग अति शुभ रहेगा।
नवरात्रि 2020
- पहले दिन देवी शैलपुत्री
- दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी
- तीसरी चंद्रघंटा
- चौथी कूष्मांडा
- पांचवी स्कंध माता
- छठी कात्यायिनी
- सातवीं कालरात्रि
- आठवीं महागौरी
- नौवीं सिद्धिदात्री।