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Budhwar Vrat Udyapan: आप भी करना चाहते हैं बुधवार के व्रत का पारण, जानें इसका सही तरीका

Tue, 26 Jul 2022 03:55 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Budhwar Vrat Udyapan Vidhi In Hindi: हिन्दू धर्म में हर दिन का अपना महत्व है। भक्त अपने आराध्य का दिन के हिसाब से व्रत-उपवास रखते हैं और उनकी उपासना करते हैं। व्रत रखने के बाद एक समय के बाद इसका उद्यापन करना  भी आवश्यक है। 

 
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बुधवार के व्रत उद्यापन का सही तरीका - फोटो : istock
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विस्तार
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Budhwar Vrat Udyapan: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी देवी या देवता को समर्पित होता है जिस दिन उनकी विशेष पूजा होती है और व्रत रखा जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए जितना व्रत रखने का महत्व है उतना ही महत्वपूर्ण उस व्रत का उद्यापन करना है। इसलिए जातकों को किसी भी व्रत का उद्यापन करते समय पूरे विधि-विधान से नियमानुसार ही हो। हम आपको आज बुधवार के व्रत के उद्यापन की जानकारी देंगे। आइए जानते हैं उद्यापन की सम्पूर्ण विधि।

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बुधवार व्रत उद्यापन विधि 
बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश और बुध देव को समर्पित होता है। व्रत आरंभ करते समय एक निश्चित समय अवधि के लिए व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है। जब वह अवधि पूर्ण हो जाती है तो जातक को पूरी विधि और नियम के अनुसार उस व्रत का उद्यापन करना चाहिए। अग्नि पुराण के अनुसार बुध संबंधी व्रत विशाखा नक्षत्रयुक्त बुधवार को आरंभ करना चाहिए और लगातार सात बुधवार अथवा यथा सामर्थ्य व्रत करना चाहिए। 

  • बुधवार के दिन प्रात:काल उठकर नित -क्रम कर स्नान कर लें। 
  • हरा वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को स्वच्छ कर शुद्ध कर लें। 
  • सभी सामग्री एकत्रित कर लें। लकड़ी के चौकी पर हरा वस्त्र बिछाएं। 
  • कांस्य का पात्र रखें । पात्र के ऊपर बुध देव की प्रतिमा को स्थापित करें। 
  • सामने आसन पर बैठ जाएं। सभी पूजन सामग्री एकत्रित कर बैठ जाएं।
     

बुधवार के व्रत उद्यापन का सही तरीका - फोटो : istock
पवित्रीकरण
सर्वप्रथम हाथ में जल लेकर मंत्र के द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कें:-
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥

इसके पश्चात् पूजा कि सामग्री और आसन को भी मंत्र उच्चारण के साथ जल छिड़क कर शुद्ध कर लें:-
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

संकल्प
हाथ में जल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर निम्न मंत्र के साथ उद्यापन का संकल्प करें
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः. श्री मद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम् उत्तमे अमुकमासे (जिस माह में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) अमुकपक्षे (जिस पक्ष में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) अमुकतिथौ (जिस तिथि में उद्यापन कर रहे हों, उसका नाम) बुधवासरान्वितायाम् अमुकनक्षत्रे (उद्यापन के दिन, जिस नक्षत्र में सुर्य हो उसका नाम) अमुकराशिस्थिते सूर्ये (उद्यापन के दिन, जिस राशिमें सुर्य हो उसका नाम) अमुकामुकराशिस्थितेषु (उद्यापन के दिन, जिस –जिस राशि में चंद्र, मंगल,बुध, गुरु शुक, शनि हो उसका नाम) चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः (अपने गोत्र का नाम) अमुक नाम (अपना नाम) अहं बुधवार व्रत उद्यापन करिष्ये.
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बुधवार के व्रत उद्यापन का सही तरीका - फोटो : अमर उजाला
  • पंचामृत स्नान के बाद दूसरे पात्र में गंगाजल लेकर चम्मच से बुध देव को शुद्धोदक स्नान के लिये जल अर्पित करते हुये मंत्र का उच्चारण करें-ॐ बुधाय नम: शुद्धोदक स्नानम् समर्पयामि.
  • बुध देव को यज्ञोपवीत वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। 
  • इसके बाद गणेश जी की आरती करें। 
  • फिर अपने स्थान पर खड़े हो कर बाएं से दाएं की ओर घूमकर प्रदक्षिणा करें।
  • फिर अपने स्थान पर खड़े हो कर बाएं से दाएं की ओर घूमकर प्रदक्षिणा करें।
  • अब 21 अथवा सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों को यथाशक्ति भोजन कराएं और दक्षिणा दें। 
  • भगवान गणेश के किसी भी स्तोत्र अथवा पाठ की एक एक पुस्तक हरे वस्त्र सहित दक्षिण में दे सकते हैं। 
  • तत्पश्चात् बंधु-बांधवों सहित स्वयं भोजन कर व्रत का उद्यापन करें। 
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