दाईं ओर घूमी हुई सूंड- शक्ति और विजय का प्रतीक
यदि गणेशजी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हो, तो यह सूर्य के तेज और उग्र स्वरूप को दर्शाती है। ऐसे गणेशजी को 'सिद्धिविनायक' कहा जाता है। इनकी पूजा विशेष नियमों और विधियों के साथ की जाती है, अन्यथा अनिष्ट की संभावना रहती है। आमतौर पर ऐसी प्रतिमाएं घर में नहीं रखी जातीं, बल्कि मंदिरों में स्थापित की जाती हैं। दायीं सूंड वाले गणेशजी की आराधना शत्रु नाश, कार्य सिद्धि और बल प्राप्ति के लिए की जाती है।
बाईं ओर घूमी हुई सूंड- शांति और समृद्धि की दाता
बाईं ओर मुड़ी सूंड को चंद्रमा का सौम्य प्रभाव माना गया है। यह स्वरूप घरेलू पूजा के लिए सबसे उपयुक्त होता है। ऐसी प्रतिमा को पूजाघर या मुख्य द्वार पर स्थापित करने से सुख-शांति, धन-लाभ, संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि मिलती है। विघ्नविनाशक यह स्वरूप घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है और सकारात्मकता को बढ़ाता है। बुधवार को यदि इस स्वरूप की विशेष पूजा की जाए तो संपूर्ण परिवार को शुभ फल मिलते हैं।
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सीधी सूंड वाले गणेश -साधना और आत्मिक उत्थान के प्रतीक
श्री गणेश का एक अत्यंत दुर्लभ स्वरूप वह है, जिसमें उनकी सूंड सीधी होती है। यह स्वरूप तीनों दिशाओं में दिखाई देता है और आत्मज्ञान, साधना, कुण्डलिनी जागरण और मोक्ष प्राप्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है। अक्सर ऋषि-मुनि या संतजन इसी स्वरूप की उपासना करते हैं। यदि कोई साधक आत्मिक विकास की दिशा में अग्रसर होना चाहता है, तो बुधवार के दिन इस स्वरूप की साधना शुभ फलदायी होती है।
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बुधवार को सूंड अनुसार करें श्री गणेश की स्थापना
- घर, कार्यालय या किसी स्थान पर श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पूर्व सूंड की दिशा का ध्यान रखना अति आवश्यक है।
- यदि शांति, सौम्य वातावरण और सुख-समृद्धि की कामना हो, तो बाईं सूंड वाले गणेशजी उपयुक्त हैं।
- यदि किसी विशेष कार्य की सिद्धि या शत्रु पर विजय की इच्छा हो, तो धार्मिक विधि से दाईं सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करें।
- आध्यात्मिक साधना के लिए सीधी सूंड वाले गणेशजी सर्वोत्तम हैं।