लोगों के संकट दूर करने वाले
महादेव खुद इतने विवश हो सकते हैं कभी आपने सोचा नहीं होगा। हर साल दो साल पर बिजली
कड़कती है और महादेव के शिवलिंग के टुकड़े-टुकड़े कर देती है। यह सिलसिला सदियों से
चला आ रहा है और महादेव चुपचाप इस दर्द को सहते चले आ रहे हैं। महादेव के दर्द को
दूर करने के लिए मक्खन का मरहम लगाया जाता है और मक्खन से उनके टुकड़ों को जोड़कर
पुनः शिवलिंग को आकार दिया जाता है।
महादेव का यह शिवलिंग कुल्लू से 18
किलोमीटर की दूरी पर मथान नामक स्थान पर स्थित है। शिवलिंग पर बिजली गिरते रहने के
कारण यह शिवलिंग बिजलेश्वर महादेव के नाम से पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस
शिवलिंग को स्थानीय लोग मक्खन महादेव भी कहते हैं। पुराणों में उल्लेख है कि यह
महादेव का प्रिय योग स्थल है, यहीं पर महादेव ने जलंधर नामक असुर का वध किया था।
बिजलेश्वर महादेव के विषय में मान्यता है कि जब कभी भी संसार पर संकट आने
वाला होता है तब महादेव संकट को अपने ऊपर ले लेते हैं। पुराणों में महादेव पर बिजली
गिरने का कारण यह बताया गया है कि बिजली के अत्यधिक प्रभाव से मानवजाति की रक्षा के
लिए वशिष्ठ मुनि ने शिव जी से प्रार्थना की।
इसके बाद भगवान शिव ने बिजली
का रूख अपनी ओर कर लिया और शिव के प्रतीकात्मक रूप शिवलिंग के टुकड़े हो गये। इसके
बाद से ही यह घटना हर साल दो साल पर होती है। कभी मंदिर का ध्वज बिजली से
टुकड़ा-टुकड़ा हो जाता है तो कभी शिवलिंग।