भगवान गणेश बुद्घिमान होने के साथ ही बचपन से ही बड़े नटखट थे। इन्हें बड़े भाई को सताना और उनके साथ खेलना बड़ा ही अच्छा लगता था। लेकिन इनका यही नटखटपन इनके लिए मुसीबत बन गया।
कुमार कार्तिक स्त्री पुरूष के अंग लक्षणों पर ग्रंथ (पामिस्ट्री) लिख रहे थे। कार्तिक ने अभी सिर्फ पुरूषों के अंग लक्षणों को ही लिखा था कि गणेश जी आकर लेखन में विघ्न डालने लगे।
कुमार कार्तिक ने गणेश जी को काफी समझाया लेकिन गणेश जी ने बड़े भाई की बात नहीं मानी। क्रोधित होकर कार्तिक ने गणेश जी की एक दांत तोड़ दी। इसके बाद तो गणेश जी भागे पिता महादेव के पास।
महादेव ने जब गणेश जी की एक टूटी हुई दांत देखी तो कार्तिक से इसका कारण पूछा। कार्तिक ने बताया कि वह अंग लक्षणों पर पुस्तक लिख रहे थे। गणेश जी के कारण स्त्रियों के अंग लक्षण वह नहीं लिख पाए, इसलिए गणेश जी की दांत तोड़ दी।