भविष्योत्तर पुराण के अनुसार यमराज ने यमुना को वरदान दिया है कि जो भी व्यक्ति यमद्वितीया के दिन यमुना के जल में स्नान करता है और बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन करता है उसकी आयु लंबी होती है।
आज यमद्वितीय है। इसे भाई दूज के नाम से भी जाना जाता है। यमद्वितीया के दिन अगर यमुना में स्नान नहीं करते हैं तो बहन के घर जाकर बहन के हाथों से यमुना जल का टीका लगवाएं और उनके हाथों से बना भोजन करें, इससे भी अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
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इस संदर्भ में एक कथा है कि यमराज अपने काम में इतने व्यस्त हो गए थे कि अपनी बहन यमुना के पास जाने का समय भी उनके पास नहीं रहा। एक दिन जब बहन यमुना का संदेश अया तब यमराज को अपनी बहन की याद आयी और सभी काम छोड़कर बहन युमना के घर पहुंच गए।
यम यमुना के स्नेह मिलन के उपलक्ष्य में यमद्वितीया का त्योहार मनाया जाता है। भगवान यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे तो यमुना ने यमराज के हाथों की पूजा की और अपने हाथ से भोजन बनाकर भाई को खाना खिलाया।
भोजन के पश्चात संध्या के समय तक यमराज यमुना के घर में रहे। माना जाता है कि हर वर्ष यमराज यमद्वितीया यानी कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना के घर आते हैं। इसलिए इस दिन यमुना जल से स्नान एवं टीका लगाना लंबी उम्र के लिए शुभ फलदायी माना गया है।