आज, 14 जुलाई को को आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि है, जिसे हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। अमावस्या तिथि पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन शुभ धार्मिक कार्य करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आषाढ़ माह की अमावस्या के दिन पितरों की पूजा, अर्चना, दान-पुण्य करने की धार्मिक मान्यता है। इस दिन सबसे पहले अपने घर के पास स्थिति पवित्र नदी में स्नान करने और सूर्य देव को पूजा का खास महत्व होता है। फिर दोपहर करीब 12 बजे पितरों के लिए पूजा पाठ और पिंडदान करना शुभ होता है। आषाढ़ अमावस्या पर कुछ उपाय बहुत ही कारगर होता है। आइए जानते हैं कौन-कौन से उपाय करना लाभकारी और शुभ रहेगा।
गंगा स्नान और पितरों का तर्पण
अमावस्या पर सुबह ब्रह्रा मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्नान करना का खास महत्व होता है। लेकिन किसी कारणवश गंगा स्नान ना हो सके तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करें। वहीं स्नान के बाद जल में काला तिल, कुश और जौ डालकर पितरों को याद करते हुए उनको तर्पण करें। इससे पितरगण तृप्त होंगे।
श्राद्ध और पिंडदान का करें विधान
अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है ऐसे में अगर किसी कारण पितरों का वार्षिक श्राद्ध कर्म नहीं हो पाया हो तो आषाढ़ अमावस्या पिंडदान कर सकते हैं। इस तिथि पर पिंडदान करना शुभ होता है और इससे जीवन में आने वाली परेशानियों का अंत हो जाता है।
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पीपल के वृक्ष की पूजा करें
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। पीपल के पेड़ में देवताओं समेत पितृगणों का भी वास होता है। ऐसे में अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा, जल और घी का दीपक जलाएं। इससे पितृदोष खत्म होता है।
पितरों के निमित्त भोजन कराएं
आषाढ़ अमावस्या पर गंगा स्नान और पितरों को तर्पण देने के बाद उनको याद करते हुए भोजन खिलाएं। गाय, कौए, कुत्ते, और जरूरमंद लोगों को भोजन करवाएं। इस परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
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तिल, अन्न और आवश्यक वस्तुओं का दान करें
अमावस्या पर दान और पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में इस तिथि पर काला तिल, गुड़, छाता, चप्पल आदि चीजों का दान करना अच्छा होता है। मान्यता है कि ऐसे दान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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