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Ashada Gupt Navratri 2021: इस बार केवल 8 दिनों की रहेगी गुप्त नवरात्रि, बनेंगे ये दो शुभ योग

Sat, 10 Jul 2021 07:50 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस बार गुप्त नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि और रवि पुष्य योग बन रहा है। ये दोनों योग बेहद शुभ योग माने जाते हैं। साथ ही गुप्त नवरात्रि पर्व 9 की जगह 8 दिनों तक रहेगा। षष्ठी और सप्तमी दोनों एक दिन पड़ रही हैं।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ashada Gupt Navratri 2021: हिन्दू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का पर्व शुरू होता है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर्व 11 जुलाई 2021 से प्रारंभ होगा जिसका समापन 18 जुलाई 2021 को होगा। इस बार गुप्त नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि और रवि पुष्य योग बन रहा है। ये दोनों योग बेहद शुभ योग माने जाते हैं। साथ ही गुप्त नवरात्रि पर्व 9 की जगह 8 दिनों तक रहेगा। षष्ठी और सप्तमी दोनों एक दिन पड़ रही हैं। गुप्त नवरात्रि में मां शक्ति की आराधना विधि-विधान से की जाती है। एक वर्ष में कुल मिलाकर चार नवरात्रि आती हैं। जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि के अलावा चैत्र और शारदीय नवरात्रि शामिल हैं। पहली गुप्त नवरात्रि माघ के महीने में आती है और दूसरी गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह में मनायी जाती है। गुप्त नवरात्रि आम नवरात्रि से भिन्न होती है। दरअसल इसमें तांत्रिक सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए मां भगवती देवी की आराधना की जाती है। इस पर्व में दस महाविद्याओं की साधना करने का विधान है। 

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घटस्थापना मुहूर्त
11 जुलाई को घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 09:08 से लेकर दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। वहीं दोपहर 12:05 से लेकर 12:59 बजे का समय शुभ रहेगा। 

10 महाविद्याओं की साधना
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में जहां नौ देवियों की विशेष पूजा का प्रावधान है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में पूजी जाने वाली 10 महाविद्याओं में मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी हैं। 

गुप्त रूप से होती है देवी की पूजा
तांत्रिकों के लिए गुप्त नवरात्रि का महत्व बहुत अधिक होता है। इसमें गुप्त रूप से देवी मां की पूजा की जाती है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में देवी की पूजा तंत्र-मंत्र के लिए की जाती है। देवी मां के हवन, पूजन आदि कर्म गुप्त रूप से रात के समय होती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं।
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तंत्र मंत्र से होती है मां भगवती की पूजा
इस नवरात्रि में तंत्र और मंत्र दोनों के माध्यम से भगवती की पूजा की जाती है। नाम के अनुसार इस गुप्त नवरात्र में की जाने वाली शक्ति की साधना के बारे में जहां कम लोगों को ही जानकारी होती है, वहीं इससे जुड़ी साधना-आराधना को भी लोगों से गुप्त रखा जाता है। मान्यता है कि साधक जितनी गुप्त रूप से देवी की साधना करता है, उस पर भगवती की उतनी ही कृपा बरसती है। 

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