भगवान को खुश करने के लिए लोगों को फूल, मिठाई और नारियल चढ़ाते हुए तो आपने कई बार देखा होगा। लेकिन एक देवता ऐसे हैं जो धनुष वाण और दूसरे अस्त्र-शस्त्र के चढ़ावे से खुश होते हैं।
इस देवता का नाम है ऐड़ी देवता। इनका मंदिर नैनीताल और चम्पावत की सीमा में ब्यानधूरा में स्थित है। स्थानीय लोग इस देवता का संबंध महाभारत के अर्जुन से मानते हैं। कहते हैं राजा ऐड़ी ने यहां तपस्या की थी और तप के बल पर इन्होंने देवतत्व को प्राप्त किया था।
ब्यानधूरा के आस-पास के लोग ऐड़ी देवता की प्रसन्नता के लिए धनुष-वाण व अन्य अस्त्र-शस्त्र भेंट करते हैं। देवता को अस्त्र शस्त्र भेंट करने की परंपरा कब से चली आ रही है, इसका कोई ठीक-ठीक अंदाजा नहीं है।
लेकिन यहां अस्त्र-शस्त्र के ढेर देखकर ऐसा अंदाजा लगाया जाता है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही होगी। बताया जाता है कि यहां के अस्त्रों के ढेर में ऐड़ी देवता का सौ मन भारी धनुष भी है।
ऐड़ी देवता के मंदिर में चैत्र नवरात्र, माघी पूर्णमा और मकर संक्रांति के दिन भव्य मेला लगता है।