फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंवला नवमी पौराणिक कथा: बीज से नहीं बल्कि आंसुओं से हुई थी आंवले के पेड़ की उत्पत्ति

Thu, 15 Nov 2018 03:26 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
आंवला नवमी 2018
विज्ञापन

प्रत्येक साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं मनाई जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार  इस दिन जो आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। साथ सभी तरह के रोगों का नाश भी होता है। इस बार ये व्रत 17 नवंबर को है। शास्त्रों में पृथ्वी पर आंवले के पेड़ की उत्पत्ति के बारे में बहुत ही रोचक कथा बताई गई है।

विज्ञापन


ऐसे प्रगट हुआ आंवला का पौधा
मान्यता के अनुसार एक बार जब पूरी पृथ्वी जल में डूबी हुई थी और इस पर दूर-दूर तक जिंदगी का कोई नामो निशान नहीं था। तब ब्रह्रााजी कमल के फूल पर तपस्या कर रहे थे। पूरी पृथ्वी के जलमग्न होने की दशा में ब्रहााजी के आंखों से अचानक आंसू टपकने लगे थे। तब ब्रह्राजी के आंसू से आंवला का का पेड़ प्रगट हुआ। तपस्या के करते-करते ब्रम्हा जी की आंखों से ईश-प्रेम के अनुराग के आंसू टपकने लगे थे। ब्रम्हा जी के इन्हीं आंसूओं से आंवला का पेड़ उत्पन्न हुआ, जिससे इस चमत्कारी औषधीय फल की प्राप्ति हुई। इस तरह आंवला वृक्ष सृष्टि में आया।

विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें