प्रत्येक साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं मनाई जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन जो आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। साथ सभी तरह के रोगों का नाश भी होता है। इस बार ये व्रत 17 नवंबर को है। शास्त्रों में पृथ्वी पर आंवले के पेड़ की उत्पत्ति के बारे में बहुत ही रोचक कथा बताई गई है।
ऐसे प्रगट हुआ आंवला का पौधा
मान्यता के अनुसार एक बार जब पूरी पृथ्वी जल में डूबी हुई थी और इस पर दूर-दूर तक जिंदगी का कोई नामो निशान नहीं था। तब ब्रह्रााजी कमल के फूल पर तपस्या कर रहे थे। पूरी पृथ्वी के जलमग्न होने की दशा में ब्रहााजी के आंखों से अचानक आंसू टपकने लगे थे। तब ब्रह्राजी के आंसू से आंवला का का पेड़ प्रगट हुआ। तपस्या के करते-करते ब्रम्हा जी की आंखों से ईश-प्रेम के अनुराग के आंसू टपकने लगे थे। ब्रम्हा जी के इन्हीं आंसूओं से आंवला का पेड़ उत्पन्न हुआ, जिससे इस चमत्कारी औषधीय फल की प्राप्ति हुई। इस तरह आंवला वृक्ष सृष्टि में आया।