मुहूर्त शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया एक अबूझ मुहूर्त या स्वयं सिद्ध मुहूर्त वाली तिथि है। अबूझ मुहूर्त या स्वयं सिद्ध मुहूर्त तिथि उसे कहते हैं जिसमें किसी भी तरह के शुभ कार्य को सपंन्न करने के लिए मुहूर्त पर विचार नहीं किया जाता। शुभ कार्य के लिए यह तिथि बेहद खास होती है। आज के दिन दान और शुभ कार्य करने पर अक्षय फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस अक्षय तृतीया के त्योहार का महत्व...
- हमारे शास्त्रों में स्वयं सिद्ध मुहूर्त या अबूझ मुहूर्त की कुल संख्या साढ़े तीन बताई गई है। ये होते हैं- पहला चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात् गुड़ी पड़वा, दूसरा विजयादशमी (दशहरा), तीसरा अक्षय तृतीया (आखातीज) और चौथा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं जिस कारण से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
- भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया की तिथि पर हुआ था।
- मान्यता है वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर ही मां गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था।
- अक्षय तृतीया की तिथि पर ही सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था।
- अक्षय तृतीया पर दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है।
- भगवान विष्णु और मात लक्ष्मी की विशेष पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
- इसी तिथि पर चार धामों में से एक धाम बद्रीनाथ के पट खुलते हैं।
- वृंदावन में बांके बिहारी के विग्रह चरणों के दर्शन साल में सिर्फ एक बार अक्षय तृतीया के दिन ही होते हैं।
अक्षय तृतीया मुहूर्त Akshaya Tritiya 2020 Shubh Muhurat Timing
साल 2020 में अक्षय तृतीया की तिथि 25 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 26 अप्रैल के दिन दोपहर 1 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। पंचांग के अनुसार 26 अप्रैल को सूर्योदय व्यापिनी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से मनाई जाएगी