वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आदि शंकाराचार्य की जयंती मनाई जाती है। इस बार 28 अप्रैल, मंगलवार को आदि शंकाराचार्य जी की जयंती है। हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार और प्राचीन भारतीय सनातन परंपरा के विकास में शंकराचार्य जी का अहम योगदान रहा है। भारत के चार कोने में आदि शंकाराचार्य जी ने मठों की स्थापना की थी। आइए, आज जानते हैं आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इन चार मठों के बारे में...
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Adi Shankaracharya Jayanti 2020
श्रृंगेरी मठ (रामेश्वरम)
भारत के दक्षिण में रामेश्वरम में श्रृंगेरी शारदा मठ स्थित है। आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित यह मठ कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध मठों में से एक है। श्रृंगेरी मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती तथा पुरी संप्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत यजुर्वेद को रखा गया है।
मठ का महावाक्य
'अहं ब्रह्मास्मि'
प्रथम मठाधीश
आचार्य सुरेश्वर जी
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Adi Shankaracharya Jayanti 2020
गोवर्धन मठ (ओडिशा)
ओडिशा के पुरी में गोवर्धन मठ स्थित है। भगवान जगन्नाथ मंदिर से गोवर्धन मठ का संबंध है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'वन' व 'आरण्य' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत ऋग्वेद को रखा गया है।
मठ का महावाक्य
'प्रज्ञानं ब्रह्म'
प्रथम मठाधीश
पद्मपाद चार्य।
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Adi Shankaracharya Jayanti 2020
शारदा मठ (गुजरात)
शारदा मठ गुजरात में द्वारकाधाम में स्थित है। शारदा मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'तीर्थ' और 'आश्रम' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत सामवेद'को रखा गया है।
उत्तराखंड के बदरीनाथ में ज्योतिर्मठ स्थित है। 8वीं सदी में आदी शंकराचार्य जी ने इसकी स्थापना की थी। ज्योतिर्मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद 'गिरि', 'पर्वत' एवं ‘सागर’ संप्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है।