सृष्टि की रचना के समय जिस महादेवी ने ब्रह्माण्ड में फैले घोर अंधकार को अपने प्रकाश से दूर करके सत्व, रज और तम गुणों से तीन महादेवियों को जन्म दिया वही देवी आद्य लक्ष्मी हैं। ब्रह्म पुराण और देवी भागवत् पुराण में बताया गया है कि आद्य लक्ष्मी ही परम शक्ति हैं। आद्य लक्ष्मी के कहने पर ही काली ने विष्णु को, लक्ष्मी ने ब्रह्मा को और सरस्वती ने शिव को उत्पन्न किया।
सृष्टि के विकास के लिए आद्य लक्ष्मी ने देवी लक्ष्मी को विष्णु को, काली को शिव को एवं सरस्वती को ब्रह्मा जी को सौंप दिया। आद्य लक्ष्मी को जननी और जगदम्बा के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने ही सबसे पहले देवी आद्य लक्ष्मी की पूजा की थी। इसी से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने विष्णु को पति रूप में स्वीकार किया था।
पद्म पुराण में कथा है कि पार्वती के पूछने पर शिव जी बताते हैं कि देवी आद्य लक्ष्मी और विष्णु भगवान दोनों ही सर्वत्र व्याप्त हैं। देवी लक्ष्मी ही सबकी आदिभूता, त्रिगुणमयी और परमेश्वरी हैं। जो भक्त देवी आद्य लक्ष्मी की पूजा करता है उनके लिए संसार में कुछ भी अप्राप्य नहीं हैं। देवी आद्य लक्ष्मी का निवास सूर्य के मध्य में है। इस दृष्टि से देवी कुष्मांडा ही आद्य लक्ष्मी हैं।