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Adhik Maas 2026: आज से अधिक मास शुरू, जानिए इस माह का महत्व और किए जाने वाले पुण्य काम

Sun, 17 May 2026 11:57 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Adhik Maas 2026: आज से यानी 17 मई 2026 से अधिक मास यानी पुरुषोत्तम माह की शुरुआत होने जा रही है। यह अधिक मास 15 जून तक चलेगा। 
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अधिक मास 2026 प्रारंभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Adhik Maas 2026:  जगत के पालनहार श्री नारायण की भक्ति करने के लिए अतिश्रेष्ठ कहे जाने वाले अधिक मास या पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ आज 17 मई से आरंभ हो गया है , जो 15 जून तक रहेगा। यह दुर्लभ संयोग ज्येष्ठ मास के दौरान बन रहा है, जिससे साल 2026 में 12 के बजाय 13 महीने होंगे और ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा। हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान शादी-विवाह, गृहप्रवेश,यज्ञोपवीत संस्कार आदि करना निषेध बताया गया है । इस माह को दान, पुण्य, धर्म, पूजा, पाठ और श्रीमद्भागवत कथा के लिए अति उत्तम माना जाता है। पुराणों की मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास के समय सभी तीर्थ ब्रज क्षेत्र में निवास करते हैं ,साथ ही ब्रजमंडल यानि भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना तीर्थ की यात्रा करने का विशेष महत्व है।

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 ब्रज में मिला स्थान
अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है।पौराणिक कथा के अनुसार अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, बचे हुए दिनों से बनकर तैयार हुआ इसलिए इस  मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में भगवान शिव ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास के अधिपति बन जाएं। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस मास को ब्रज क्षेत्र में बसाया।

अधिकमास में मरा हिरण्यकशिपु
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दैत्य हिरण्यकशिपु  ने ब्रह्माजी को अपनी घोर तपस्या से प्रसन्न कर वरदान मांगा कि मैं बारह महीनों में से किसी माह में न मारा जा सकूं,न दिन में मरूं,न रात में मरूं, उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके।वह न किसी अस्त्र से मरे, न किसी शस्त्र से। उसे न घर में मारा जा सके, न ही घर से बाहर मारा जा सके। इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकशिपु स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया।पृथ्वी पर से अत्याचार मिटाने एवं उसके उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने अधिक मास में ही नृसिंह अवतार लिया।तब बैशाख मास अधिक मास था।
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अधिकमास में क्या करें 

  • इस मास मैं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करना बहुत लाभदाई माना गया है।ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।  
  • भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान,विशेष रूप से भागवत पाठ,रामायण पाठ,गीता पाठ एवं हरिवंश पुराण पाठ आदि करना या कराना बहुत शुभ माना गया है।
  • दक्षिणावृति शंख भगवान विष्णु को अति प्रिय है,इसे देवी लक्ष्मी का भाई भी माना गया है।अधिकमास में चावल द्वारा शंख का पूजन करने पर घर में लक्ष्मी का वास होता है,धन-धान्य की कमी नहीं होती।
  • श्री हरि को तुलसी अतिप्रिय है,तुलसी माँ लक्ष्मी का ही स्वरुप हैं।घर में सम्पन्नता एवं पारिवारिक क्लेशों को दूर करने के लिए प्रातः तुलसी में नियमित रूप से शुद्ध जल चढ़ाकर,शाम के समय गाय के घी का दीपक लगाना चाहिए।साथ ही तुलसी की 21परिक्रमा करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से सुख-शांति बनी रहती है।
  • पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है। आर्थिक उन्नति एवं श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए इस मास में रविवार को छोड़कर नित्यप्रति पीपल पर मीठा जल चढ़ाकर,विष्णु मंत्र का जाप करते हुए उसकी परिक्रमा करें।

 
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