माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी मनाई जाती है। यह दिन भगवान सूर्य के जन्म दिवस का दिन भी माना जाता है। सूर्य को आरोग्यता का कारक भी माना गया है यही कारण है कि अचला सप्तमी को आरोग्य सप्तमी, रथा सप्तमी, और सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार अचला सप्तमी 19 फरवरी दिन बृहस्पतिवार यानि कल मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से जातक को आरोग्यता, खास तौर पर चर्म रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद भगवान सूर्य नारायण की पूजा करनी चाहिए। जिस तरह से हर व्रत और त्योहार के पीछे कोई न कोई पौराणिक आधार होता है, उसी तरह से सूर्य सप्तमी के व्रत रखने के पीछे भी पौराणिक आधार है। तो चलिए जानते हैं सूर्य सप्तमी की कथा और पूजा विधि