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जब गांधी जी से पहली बार मिले आचार्य श्रीराम शर्मा

Sat, 04 Oct 2014 05:39 PM IST
चेतना की शिखर यात्रा से/
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सुबह की सैर के वक्त भी गांधी जी साबरमती आश्रम में आए कुछ विशिष्ट अतिथियों को साथ ले लेते थे। फरवरी, 1931 की यह घटना है। उस दिन राजस्थान से आए एक कांग्रेस कार्यकर्ता से सुबह की बातचीत पूरी हुई, तो बापू ने अठारह-उन्नीस वर्ष के एक युवक श्रीराम (बाद में वह आचार्य श्रीराम शर्मा के नाम से प्रसिद्ध हुए) को बुला लिया।
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साथ-साथ कदम बढ़ाते हुए गांधी जी ने पूछा, तुम क्या कांग्रेस का काम करते हो? युवक ने इंकार में सिर हिलाया और कहा, वह तो कांग्रेस का सदस्य भी नहीं है। गांधी जी ने फिर पूछा, तो क्या करते हो और मुझसे क्या चाहते हो। युवक ने बताया, देशसेवा करने का मन है। आप की तरह बनना चाहता हूं।

गांधी जी ने कहा, मेरी तरह बनना है, तो सत्याग्रह आश्रम देखो। वहां जैसे लोग रहते हैं, उनकी तरह रहना सीखो। किसी भी व्यक्ति को छोटा न समझो और न ही किसी काम को। जहां तक हो सके, इन दो नियमों का पालन करना। एक तो अपने पास आवश्यकता से अधिक वस्त्र, भोजन और रुपये मत रखना।
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मैं भी नहीं रखता हूं। अगर रखना पड़े, तो उसे समाज की अमानत मानना चाहिए। दूसरा नियम यह कि अपना काम अपने हाथों से ही करना। दैनिक जीवन में दूसरों की सहायता मत लेना।

बातचीत करते हुए गांधी जी और श्रीराम वापस आश्रम पहुंचे। वहां लोग सफाई के काम में जुटे थे। सुबह का समय प्रार्थना और जप-ध्यान का होता था।

आश्रम में रह रहे लोग ठहरने की जगह के अलावा शौचालय और स्नानगृहों की सफाई भी खुद करते थे। बापू ने श्रीराम को कहा, सफाई के लिए तुम अपनी तय जगह के अलावा गोशाला की सफाई भी करना। गांव से आए हो। तुम्हें अच्छा ही अनुभव होगा। (चेतना की शिखर यात्रा से)
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