एक वजह तो यह है कि अगर ऐसा नहीं करेंगे, तो इसका करेंगे क्या? किसी पात्र में लेकर घर में रख लेंगे? अगर घर में रख लें, तो बेवजह भावुकता आएगी। दूसरी बात यह कि इस राख में शरीर के गुण मौजूद रहते हैं। अगर श्मशान से आप किसी के शरीर की राख को लें और उस इंसान का डीएनए आपके पास है, तो फोरेंसिक लैब वाले बता देंगे कि यह राख किसकी है? क्योंकि राख में उस इंसान के कुछ खास गुण मौजूद हैं। अक्सर जब तांत्रिक अपने अनुष्ठान करते हैं, जिसमें वे मरे हुए लोगों को बुलाने की कोशिश करते हैं, तो वे श्मशान की राख का ही प्रयोग करते हैं। अघोरी हमेशा युवा मृत शरीर को ही ढूंढते हैं और उस पर बैठकर साधना करते हैं, क्योंकि वे मृत शरीर के व्यान प्राण और ऊर्जा का इस्तेमाल करके उसे सक्रिय करना चाहते हैं। जब भी उन्हें मनमाफिक शरीर मिलता है, उनमें से दो तीन लोग उस पर साधना करते हैं। वे वैसे तांत्रिक होते हैं, जिनका झुकाव अध्यात्म की ओर होता है। वे अपने लिए साधना करना चाहते हैं। इस वजह से भी राख को या तो किसी नदी में बहा देते हैं या उसे यूं ही फैला देते हैं।