फकीर असमद एक दिन किसी गांव से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें एक औरत मिली, जिसने उन्हें बताया कि उसका बेटा बहुत बीमार है। वह औरत अपने बेटे के इलाज के लिए अपने बूते का हर उपाय कर चुकी थी। मगर कोई उपाय कारगर नहीं हुआ। उसका बेटा पूर्व की तरह बीमार रहा।
अलबत्ता उसकी हालत और बिगड़ने लगी थी। उस महिला को असमद की करामाती शक्तियों के बारे में कुछ भी पता नहीं था। वह तो यह सोचकर असमद को निमंत्रण दे बैठी थी कि उसे फकीर के वेश से बड़ी उम्मीदें थीं।
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फकीर असमद ने औरत से अपने घर ले चलने के लिए कहा। जब असमद उसके घर पहुंचे, तो आसपास के कई घरों के लोग भी वहां आ गए। उन लोगों ने पहले कभी किसी फकीर को नहीं देखा था। उत्सुकतावश वे वहां भीड़ लगाकर खड़े हो गए। औरत अपने बीमार बच्चे को असमद के पास लेकर आई। असमद ने बड़े प्यार से बच्चे को गोद में लेकर उसके स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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तभी भीड़ में से एक आदमी ने चिल्लाकर असमद से पूछा, क्या आपको वाकई लगता है कि आपकी प्रार्थना से यह बच्चा अच्छा हो जाएगा, जबकि इस पर सारी दवाइयां बेकार साबित हो चुकी हैं? फकीर असमद ने उससे कहा, तुम मूर्ख हो! तुम इन सब बातों के बारे में कुछ नहीं जानते!
यह सुनते ही उस आदमी का चेहरा गुस्से से तमतमा गया। वह कुछ कहने वाला ही था कि असमद उसके पास आए और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोले, यदि एक शब्द में तुम्हें इतना क्रुद्ध और तप्त करने की शक्ति है, तो दूसरे शब्द क्या तुम्हें शांत और स्वस्थ नहीं कर सकते? इस प्रकार फकीर असमद ने वहां दो लोगों को स्वस्थ कर दिया।