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इस तरह आत्माएं हमसे संपर्क बना लेती हैं

Sat, 05 Mar 2016 01:06 PM IST
राकेश झा/अमर उजाला, दिल्ली
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आत्मा
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मुण्डकोपनिषद् के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ है। इनका केन्द्र हिमालय की वादियों में उत्तराखंड में स्थित है। इसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है। इन दुर्गम क्षेत्रों में स्थूल-शरीरधारी व्यक्ति सामान्यतया नहीं पहुंच पाते हैं।
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अपने श्रेष्ठ कर्मों के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माएं यहां प्रवेश कर जाती हैं। जब भी पृथ्वी पर संकट आता है, नेक और श्रेष्ठ व्यक्तियों की सहायता करने के लिए पृथ्वी पर भी आते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का इस मामले में कुछ और ही कहना है।
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आत्माएं हमसे संपर्क करती हैं

आत्मा
प्रसिद्घ भौतिक विज्ञानी मार्टिन गार्डनर ने लिखा है कि- इस संसार में हर दिन हजारों व्यक्तियों के साथ ऐसी छोटी-बड़ी घटनाएं घटती रहती है जिसे महज संयोग या अपवाद मानकर खारिज कर दिया जाता है।

इन घटनाओं में से कुछ को भले ही संयोग मान लिया जाए लेकिन ऐसी विलक्षण घटनाएं होती हैं उन्हें मात्र संयोग नहीं कहा जा सकता।

ब्रिटेन के विख्यात भौतिकशास्त्री और गणितज्ञ एड्रिन डॉब्स ने विभिन्न अनुसंधानों के उपरांत यह निष्कर्ष दिया कि ब्रह्माण्ड में ऐसी सूक्ष्म संदेश वाहक शक्तियां निरंतर प्रवाहित होती रहती है जो मानवी ज्ञानेन्द्रिय से संपर्क स्थापित करती है।
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इस तरह आत्माएं भौतिक आकार ग्रहण करती है

आत्मा
इन तरंगों की वेवलेन्थ तरंग दैर्ध्य लगभग एक समान होती है। द रूट्स ऑफ कोइन्सीडेन्स नामक पुस्तक में आर्थर कोएस्लर ने लिखा है कि- इस माध्यम से ब्रह्माण्ड व्यापी अदृश्य चेतन-शक्तियां शरीरधारी मनुष्यों से संपर्क साधती है, उन्हें पूर्वाभास कराती है, मार्गदर्शन कराती है और संकट के समय मनोबल बढ़ाने वाली चेतना देती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि सूक्ष्म शरीरधारियों में एक्टोप्लाज्म नामक एक सूक्ष्म द्रव्य मौजूद होता है। संभवतः जीवात्मा इन्हीं का उपयोग करके भौतिक आकार ग्रहण करती है।
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