फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

10 जनपथ से तीन मूर्ति भवन तकः मृत्यु और वास्तु की कई दास्तां

विज्ञापन
विज्ञापन
भारत की राजधानी दिल्ली में कई ऐसे भवन हैं जिनमें पारलौकिक शक्तियों की उपस्थिति मानी जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें वह भवन भी शामिल हैं जिनमें देश के बड़े-बड़े मंत्री रह रहे हैं या रह चुके हैं।
विज्ञापन


कई अधिकारियों के भवन भी ऐसे हैं जो पारलौकिक शक्तियों के लिए जाने जाते हैं। द संडे गार्जियन में इन भवनों का उल्लेख किया गया है।
Trending Videos

इस भवन ने बनाए तीन प्रधानमंत्री

दिल्ली का लुटिन जोन यहां 9, मोतीलाल नेहरू प्लेस नाम का एक बंगला है। इस बंगले की दास्तां यह है कि जो भी इस बंगले में रहा उसने बड़ी सफलताएं हासिल की। 1940 की बात है इस इस बंगले में पंडित जवाहर लाल नेहरू रहा करते थे। उन दिनों इस बंगले का नाम यॉर्क प्लेस था।

देश की आजादी के बाद जब अंतरिम सरकार का गठन हुआ और पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने तो इन्होंने इस भवन को छोड़ दिया और तीनमूर्ति भवन में चले गए।

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकार में जब पी वी नरसिम्हा राव केन्द्रीय मंत्री बने तो काफी समय तक इस भवन में रहे। राजीव गांधी की हत्या के बाद नरसिंम्हा राव प्रधानमंत्री बने। इस भवन ने एक अन्य व्यक्ति को भी देश का प्रधानमंत्री बनाया और यह नाम है इंद्र कुमार गुजराल।

वास्तुशास्त्रियों का मानना है कि इस भवन का वास्तु इतना अच्छा है कि इस भवन में रहने वाले अधिकारियों को ऊंचाई पर ले जाता है।

प्रधानमंत्री के लिए बड़ा अशुभ रहा यह भवन

दिल्ली का 10 जनपथ जो आज सोनिया गांधी और राहुल गांधी का निवास स्थान है। इस भवन का इतिहास बड़ा ही मनहूस रहा है। 1977 में जब इस भवन को भारतीय युवा कांग्रेस का ऑफिस बनाया गया तब कई कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर यहां खून के निशान देखे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीवगांधी इस भवन में आए और 18 महीने के बाद ही उनकी हत्या कर दी गई। इसी तरह लालबहादुर शास्त्री भी इस भवन में रहने आए और ठीक 18 महीने बाद इनकी मृत्यु हो गई। वर्तमान में इस भवन में सोनिया और राहुल गांधी का निवास है।

राजीव गांधी की हत्या के बाद कई बार कांग्रेस की सरकार बनी है। लेकिन गांधी परिवार से कोई भी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया। आप ही सोच कर देखिए क्या यह इस भवन का दोष तो नहीं जो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने नहीं दे रहा है।
विज्ञापन

यह भवन भी है बड़ा मनहूस

33, शामनाथ मार्ग भवन को भी मनहूस भवन माना जाता है। 1993 में मदनलाल खुराना जब दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो इस भवन में रहने आए। तीन साल बाद ही फरवरी 1996 में हवाला मामले में ऐसे उलझे की मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी।

इसके बाद शीला सरकार के मंत्री रहे दीप चंद्र बंधु ने इस भवन में रहना स्वीकार किया। मंत्री पद पर रहते हुए बंधु की मौत हो गई। इसके बाद से यह भवन राजनेताओं और अधिकारियों के लिए अशुभ माना जाने लगा।

अब यह भवन दिल्ली सरकार के गेस्ट हाउस के तौर पर प्रयोग में लाया जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें