मशहूर जर्मन संगीतज्ञ मैंडेलसान के दादाजी मौसेज मैंडेलसान का हुलिया आकर्षक नहीं था। एक तो उनका कद छोटा था, दूसरे उनके शरीर पर एक अजीब-सा कूबड़ था। इस वजह से वह देखने में और असुंदर लगते थे।
एक बार वह हैमबर्ग के किसी व्यापारी से मिलने गए। जाने का मकसद कारोबारी था, लेकिन व्यापारी से मुलाकात घर पर ही तय हुई। मौसेज ने वहां बेहद खूबसूरत लड़की फ्रमजी को देखा। वह उस व्यापारी की ही बेटी थी। मौसेज को पहली ही नजर में वह भा गई। फ्रमजी को भी मौसेज सुहाए।
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वह सोचने लगी कि मौसेज अगर सुंदर होते, उनका व्यक्तित्व थोड़ा भी मेल खाता, तो वह खुद उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख देती। लेकिन अजीब से हुलिए के कारण फ्रमजी ने मौसेज को नजर अंदाज कर दिया। जब चलने का वक्त आया, तो मौसेज ने हिम्मत जुटाई।
यह फ्रमजी से बात करने का आखिरी मौका था। वह उसके कमरे तक पहुंचे। पर वह मौसेज की तरफ देखना भी नहीं चाहती थी। यह देखकर मौसेज बहुत दुखी गए। उन्होंने बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन बात हो नहीं पाई।
आखिर मौसेज ने पूछा, क्या आप मानती है कि शादियां स्वर्ग में तय होती हैं? हां, उस लड़की ने फर्श की तरफ देखते हुए जवाब दिया। मैं भी यही मानता हूं, मौसेज ने कहा।
देखिए, हर लड़के के जन्म के समय ईश्वर उसे यही बताता है कि उसकी शादी किससे होगी। जब मैं पैदा हुआ, तो ईश्वर ने कहा, तुम्हारी पत्नी कूबड़ी होगी। उसी वक्त मैंने प्रभु से कहा, अगर वह कुबड़ी हुई, तो कितनी बुरी बात होगी।
मेहरबानी करके कूबड़ मुझे दे दो और उसे सुंदर बना दो। तब फ्रमजी ने उसकी आंखों में देखा और अपना हाथ मैंडेलसान के हाथ में दे दिया।