पैदा होने के तीन दिन बाद की बात है। मैं रेशमी परदों वाले अपने हिंडोले में लेटा हुआ चकित और हताश-सा अपने चारों ओर की दुनिया को झांक रहा था। तभी मां ने आया से पूछा, मेरा बच्चा कैसा है?
आया ने कहा, वह बहुत अच्छा है मै'म। मैं उसे तीन बार दूध पिला चुकी हूं। इतना गोल-मटोल और हंसता-खेलता बच्चा मैंने इससे पहले कभी नहीं देखा।
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मुझे गुस्सा आ गया। मैं चीखकर बोला, यह सच नहीं है, मां। मेरा बिस्तर बहुत बेआराम है। जो दूध मुझे दिया जाता है, वह मुंह में कड़वाहट घोल देता है। लेकिन न तो मेरी मां और न नर्स ही मेरी बात समझ सकी, क्योंकि भाषा जो मैंने बोली थी, वहां की थी, जहां से मैं आया था।
पैदा होने के इक्कीसवें दिन जब मुझे संस्कारित किया जा रहा था, तो पादरी ने मां से कहा, आपको खुश होना चाहिए मैडम कि आपका बेटा ईसाई परिवार में पैदा हुआ है। मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ। मैं पादरी से बोला, तब तो तुम्हारी मां बड़ी दुखी हुई होगी, क्योंकि तुम पैदाइशी ईसाई नहीं हो। लेकिन पादरी भी मेरी भाषा नहीं समझ सका।
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सात माह बाद, एक ज्योतिषी ने मेरी मां से कहा, आपका बेटा एक राजनीतिज्ञ और महान जननेता बनेगा। मैं चिल्ला उठा, यह गलत कहता है। मैं एक संगीतकार बनूंगा; सिर्फ संगीतकार।
लेकिन उस उम्र में भी मेरी बात पर किसी ने गौर नहीं किया। और तैंतीस वर्ष बाद, मेरी मां, आया और पादरी मर चुके हैं। ज्योतिषी अभी जिंदा है। कल वह मंदिर के पास मुझसे मिला। बातों ही बातों में उसने मुझसे कहा, जब तुम गोद में थे, मैंने तभी भविष्यवाणी कर दी थी कि तुम बहुत बड़े संगीतकार बनोगे।
मैंने उसकी बात मान ली, क्योंकि अब मैं भी उस दूसरी दुनिया की भाषा भूल चुका हूं।