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अपनी पत्नी से मिलने में क्यों घबरा गए यह संत?

Tue, 16 Dec 2014 12:16 PM IST
रश्मिप्रभा
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स्वामी राम शुरुआती दौर में संन्यासी की तरह रहते थे। उसी वेष में वह अमेरिका गए। जब वह अमेरिका से लौटे, यह तब की बात है। विदेश से लौटकर वह हिमालय पर चले गए। सरदार पूर्णसिंह उनके शिष्य थे और वह भी उनके पास ही रहते थे।
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एक दिन स्वामी राम की पत्नी पंजाब से उनसे मिलने के लिए आईं। वह बड़ी गरीबी की हालत में थी। स्वामी राम के संन्यासी बनने के बाद वह किसी तरह अपना परिवार पाल रही थी। पति के अमेरिका से लौट आने का पता चला, तो किसी तरह थोड़े पैसे इकट्ठा करके स्वामी राम के दर्शन करने के लिए वह पहुंची।

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स्वामी राम को पता चला, तो उन्होंने सरदार पूर्णसिंह से कहा कि वह उनसे नहीं मिलना चाहते। सरदार पूर्णसिंह यह सुनकर बहुत हैरान हुए, क्योंकि स्वामी राम ने कभी किसी से मिलने से इन्कार नहीं किया था। आखिर इस स्त्री से मिलने के इन्कार का क्या अर्थ हो सकता है।
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आखिर सरदार पूर्णसिंह ने पूछ ही लिया, अगर आप इस स्त्री से नहीं मिलेंगे, तो मैं आपको छोड़कर जाता हूं। क्योंकि आप तो कहते हैं कि सब छोड़ चुके, अगर छोड़ चुके, तो यह भाव अब तक मन में क्यों है? यह सुनकर स्वामी राम की आंखों से आंसू गिर गए और उन्होंने कहा, तुम ठीक कहते हो, थोड़ी झंझट मेरे भीतर थी। तुमने मुझे खूब ठीक समय पर चेताया। उसे बुलाओ। और स्वामी जी ने उसी दिन अपना चोला उतार दिया, क्योंकि उन्हें बोध हुआ कि उनमें जो त्याग की अकड़ है, वह भ्रांति है।

फिर स्वामी राम ने कभी भगवा वस्त्र नहीं पहने। जब वह मरे, तो वह साधारण वस्त्र पहने हुए थे। अंतर्दृष्टि से संपन्न व्यक्ति कहते हैं कि स्वामी परम संन्यासी होकर मरे। उन्होंने दुनिया तो त्यागी ही, त्याग करने का बोध भी छोड़ दिया।
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