बीहड़ की रानी के नाम से कुख्यात फूलन देवी से एक जमाने में लोग खौफ खाते थे। पुलिस ने इन्हें पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन हर बार नाकाम रही।
1983 में इंदिरा गांधी की सरकार ने जब फूलन देवी से समझौता किया कि उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा, तब फूलन ने अपने दस हजार समर्थकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इसके बाद फूलन 11 साल तक जेल में रही। 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इन्हें रिहा कर दिया।
इसके बाद 1996 में फूलन ने भदोही से लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बनी। सांसद बनने के बाद फूलन को 44 अशोका रोड में सरकारी आवास मिला।
इसी आवास में 2001 में फूलन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के कुछ समय बाद तक फूलन का आवास खाली रहा।
इसके बाद इस आवास में कैलाश मेघवाल रहने आए। कुछ दिन बाद 44 अशोका रोड से यह खबर आई कि इस आवास में फूलन की आत्मा भटकती है।
उस समय कहा गया कि इस आवास में फूलन की आत्मा डाकू के रूप में घूमती है। हालांकि बाद में कैलाश मेघवाल ने इस बात को अफवाह बताते हुए फूलन की आत्मा भटकने की बात का खंडन किया।