संसार का सबसे बड़ा रहस्य है मौत। और इससे भी बड़ा रहस्य है मौत के पहले के अनुभव। इस विषय पर कुछ ऐसे शोध हुए है जो बताते हैं कि मरने से पहले हर व्यक्ति को पता चल जाता है कि उसकी मौत की घड़ी आ पहुंची है।
इस रहस्य पर से सबसे पहले पर्दा उठाने का श्रेय अमेरिका की मनोचिकित्सक डॉ. एलिजाबेथ कुबलर-रॉस को जाता है। इन्होंने मौत के करीब पहुंचने वाले व्यक्तियों से उनके अनुभव और भावनाओं के बारे में पूछने का साहस किया।
इनके इस व्यवहार के कारण शिकागो के जिस अस्पताल में यह कार्यरत थी, काफी हंगामा हुआ। इसके बावजूद इन्होंने अपने खोज जारी रखे।
इन्होंने अपनी पुस्तक 'ऑन डेथ एंड डाइंग' में मौत के करीब पहुंच चुके लोगों के अनुभवों का जिक्र किया है। हाल के वर्षों में चिकित्सा विज्ञान में जिस तरह से प्रगति हुई उसमें हार्ट अटैक और दूसरे गंभीर रोगों से मौत के करीब पहुंच चुके लोगों को भी कई बार बचा लिया जाता है।
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मौत के मुंह से निकलकर वापस आने वाले लोग बताते हैं मौत के करीब जाने पर अचानक चेतना शून्य हो जाती है। स्वयं मरे हुए लोगों के बीच होने का एहसास होता है।परिवार में जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनके अपने आस-पास होने की अनुभूति होती है।जीवन में हुई घटनाएं किसी चलचित्र की तरह आंखों के सामने चल रही होती है। शरीर से बाहर हवा में तैरते हुए आसपास के क्षेत्र को देखने का अनुभव होता है।अंधेरे सुरंग से होते हुए किसी ऐसे स्थान पर पहुंचने का अनुभव होता है जहां सूर्य से भी तेज प्रकाश फैला हुआ है।