फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस तरह पता चला मछली पूर्वजन्म में धोखेबाज इंसान थी

Tue, 04 Nov 2014 04:59 PM IST
ओशो
विज्ञापन
विज्ञापन
भगवान बुद्ध श्रावस्ती में विहार कर रहे थे। पास की केवट बस्ती के कुछ मल्लाहों ने स्वर्ण-वर्ण की एक अद्भुत मछली पकड़ी। मल्लाहों ने ऐसी मछली पहले न देखी थी। वे राजा के पास गए। राजा को भी कुछ समझ नहीं आया, तो वह उसे भगवान के पास ले गए। और उसी समय मछली ने अपना मुख खोला। राजा ने पूछा : भंते, इसका शरीर स्वर्ण वर्ण का क्यों हो गया। और इसके मुख से कितनी दुर्गंध आ रही है!
विज्ञापन


देखें, स्त्रियों की नाभि देखिए और जानिए उनके बड़े राज

भगवान ने मछली को गौर से देखा और चले गए उसके पूर्व जन्म में। उन्होंने कहा, यह कोई साधारण मछली नहीं है। यह कश्यप बुद्ध के शासन काल में कपिल नाम का महापंडित भिक्षु था। इसने संन्यास धारण किया था। त्रिपुटक था, ज्ञानी था, विद्यावान था। इसने अपने गुरु को धोखा दिया।

पढ़ें,साप्ताहिक राशिफलः 3 नवंबर से 9 नवंबर तक का हाल जानिए

इसकी देह तो स्वर्ण की हो गई, पर अंदर दुर्गंध भरी रह गई। राजा ने कहा, आप इस मछली के मुख से कहलाएं, तो मानें। भगवान हंसे और उन्होंने राजा को देखा। मछली की आंखों में झांककर उन्होंने कहा, याद करो, भूले को याद करो, तुम्हीं हो कपिल, झांककर देखो!
विज्ञापन


मछली बोली : हां, मैं ही कपिल हूं। और उसकी आंखों से पश्चाताप के आंसू भर आए। आगे कोई शब्द नहीं निकला। खो गई वह उस क्षण में, जब उसने गुरु को धोखा दिया था। आंखें खुली रह गईं और प्राण निकल गए। पर एक चमत्कार हुआ। उसका मुख तो पहले की तरह ही खुला था, पर अब उसमें दुर्गंध नहीं थी।

जैसे ही दुर्गंध विलीन हुई, एक गहन शांति छा गई। सारे भिक्षु इकट्ठा हो गए मछली को देखने। जैतवन अपूर्व सुगंध से भर उठा। भिक्षु उस सुगंध से परिचित थे। यह बुद्धत्व की गंध थी। हम उसे नहीं जान सकते, जब तक गंदगी से भरे हैं। ध्यान हमारे तन-मन की स्वच्छता का नाम है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें