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ऐसा गधा जो मरकर भी मालामाल कर गया, जानिए कैसे?

Wed, 12 Nov 2014 03:12 PM IST
- ओशो
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एक फकीर ने किसी बंजारे को एक गधा भेंट किया। बंजारा बड़ा खुश हुआ। अब उसे पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती थी, सामान भी खुद नहीं ढोना पड़ता था। लेकिन एक बार गधा अचानक बीमार पड़ा और मर गया। बंजारे ने उसे दफना दिया और कब्र के पास बैठकर रोने लगा। तभी एक राहगीर वहां से गुजरा। उस राहगीर ने सोचा कि जरूर किसी खास व्यक्ति की मृत्यु हो गई और कब्र के आगे झुककर आदर व्यक्त करने लगा।
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बंजारे को हंसी आई, लेकिन वह चुप रहा। उसे लगा कि कब्र के पास बैठे रह कर अच्छा व्यवसाय किया जा सकता है। वह उसी कब्र के पास बैठकर रोने लगा। धीरे-धीरे आसपास के गांवों मे खबर फैल गई कि कोई महान आत्मा चल बसी है। देखते ही देखते वहां एक समाधि बन गई और फिर चढावा भी आने लगा। इस तरह कुछ ही दिनों में वह बंजारा बहुत धनी हो गया।

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फिर एक दिन वह सूफी फकीर उधर से निकला, जिसने वह गधा भेंट किया था। उसने बंजारे को देखा, जो वहां बैठा रो रहा था। उसने उस बंजारे से कहा, किसकी कब्र है यह, और तू यहां बैठा क्यों रो रहा है। उस बंजारे ने कहा, अब आप से क्या छिपाना, जो गधा आपने दिया था, उसी की कब्र है। जीते जी भी उसने बड़ा साथ दिया और मर कर और ज्यादा साथ दे रहा है। और फिर उस बंजारे ने फकीर को सारी कहानी सुना दी।
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कहानी सुनते ही फकीर खिल-खिलाकर हंसने लगा। उस बंजारे ने पूछा, आप हंस क्यों रहे हैं? फकीर ने कहा, तुम्हें पता है। जिस गांव में मैं रहता हूं, वहां भी एक पहुंचे हुए महात्मा की कब्र है। उसी से तो मेरा काम चलता है। बंजारे ने पूछा, क्या आपको मालूम है कि वह किस महात्मा की कब्र है? फकीर ने कहा, वह इसी गधे की मां की कब्र है।
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