हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी के रूप में मनाई जाती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय होती है। इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की जाने वाली पूजा, जप और उपवास का विशेष महत्व होता है और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलती है और जिन लोगों को बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है उनके लिए यह व्रत बहुत शुभफलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिये हुए श्राप का भी निवारण हो जाता है। एकादशी पर मंत्रों का जाप करना भी बहुत ही फलदायी होता है। आइए जानते हैं किन मंत्रों के जाप करने से एकादशी का शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। भगवान विष्णु के प्रिय मंत्रों का जप अत्यंत फलदायक होता है। नीचे बताए गए सात मंत्रों का जप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह भगवान विष्णु का सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। इसका निरंतर जप मन को शांत करता है और भक्त को श्रीहरि का सान्निध्य प्राप्त होता है।
2. ॐ विष्णवे नमः
यह मंत्र भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। इससे समस्त दोषों का नाश होता है और जीवन में शुभता आती है।
3. ॐ श्रीं लक्ष्मीनारायणाय नमः
यह एक शक्तिशाली मंत्र है, जो देवी लक्ष्मी और भगवान नारायण को समर्पित है। यह मंत्र धन, समृद्धि, शांति और जीवन में संतुलन लाने के लिए जाना जाता है। इसका नियमित जाप मानसिक शुद्धि, आत्मिक बल और भक्तिभाव को बढ़ाता है।
4. ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
यह नारायण गायत्री मंत्र है जो आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
5. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
भगवान विष्णु को पुरुषोत्तम कहा जाता है। यह मंत्र जीवन की सभी कठिनाइयों से मुक्ति दिलाता है। यह मंत्र भगवान विष्णु के सर्वोच्च और महानतम रूप का स्मरण करता है।
6. ॐ अच्युताय नमः
भगवान विष्णु के एक नाम 'अच्युत' का जप करने से अनंत पुण्य मिलता है। यह मंत्र निष्ठा और समर्पण की भावना को जाग्रत करता है।यह मंत्र भगवान विष्णु की दिव्यता और शाश्वतता का प्रतीक है, जो सभी मनुष्यों को शांति और समृद्धि प्रदान करता है.
7. ॐ दामोदराय नमः
यह मंत्र भगवान विष्णु के दामोदर रूप की आराधना के लिए है। इससे पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और कल्याण प्राप्त होता है।
जाप विधि:
इन मंत्रों का जप सूर्योदय से पूर्व स्नान कर, पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर करें। प्रत्येक मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। तुलसी पत्र और पीले पुष्प अर्पित करें। व्रत कथा अवश्य सुनें और दान-पुण्य करें।