इस सप्ताह के व्रत-त्योहार (14 से 20 जून, 2021)
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इस सप्ताह (14 से 20 जून) कई मुख्य व्रत-त्योहार आ रहे हैं। सप्ताह की शुरूआत जहां विनायक चतुर्थी व्रत से हो रही है तो वहीं इसका अंत गंगा दशहरा से होगा। इस बीच मिथुन संक्रांति, मासिक दुर्गाष्टमी और महेश नवमी जैसे व्रत-त्योहार भी इसी सप्ताह में पड़ रहे हैं। आइए जानते हैं इस सप्ताह पड़ने वाले व्रत त्योहारों के बारे में-
विनायक चतुर्थी 14 जून को है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जातकों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मिथुन संक्रांति पर्व 15 जून मंगलवार को मनाया जाएगा। मिथुन संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा का विधान है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का खास महत्व है। इस दिन पुण्य फल प्राप्त करन के लिए दान-धर्म के कार्य किए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति में बदलाव का संकेत माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन से वर्षा ऋतु की शुरूआत हो जाती है। साथ ही लोग इस दिन अच्छी खेती के लिए भगवान से खूब बारिश की मनोकामना करते हैं।
प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत किया जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की स्कंद षष्ठी 16 जून 2021दिन बुधवार को पड़ रही है। यह तिथि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कुमार कार्तिकेय भगवान को समर्पित की जाती है। इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है, इसलिए इस तिथि को स्कंद षष्ठी कहा जाता है।
- 18 जून: मासिक दुर्गाष्टमी
प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास में 18 जून 2021 दिन शुक्रवार को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाएगा। हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का भी बहुत महत्व माना गया है।
महेश नवमी 19 जून को है। प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी पर्व मनाया जाता है। माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के वरदान स्वरूप मानी गई है जिसका उत्पत्ति दिवस ज्येष्ठ शुक्ल नवमी है।
गंगा दशहरा पर्व 20 जून को है। गंगा दशहरा का पर्व हर वर्ष ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।