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विश्वकर्मा जी की पूजा-आराधना में जरूर करें ये आरती, ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा...

Thu, 17 Sep 2026 08:47 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या संक्रांति पर भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इस दिन विशेष रूप से कारखानों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में औजारों की पूजा का विशेष विधान होता है। 
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Vishwakarma Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सनातन धर्म में हर साल कन्या संक्रांति के दिन पड़ने वाली विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सृष्टि के पहले वास्तुकार और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा हैं। हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा पर विशेष रूप से कारखानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा होती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान के साथ पूजा करने के जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति और धन की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को विश्वकर्मा भगवान की पूजा-आराधना होगी। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। विश्वकर्मा जयंती पर औजारों और कारखानों की पूजा के साथ भगवान विश्वकर्मा की आरती का भी खास महत्व होता है। 

भगवान विश्वकर्मा  की आरती

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ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

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