फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vishwakarma Jayanti 2020: जानें विश्वकर्मा पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व

Fri, 07 Feb 2020 02:16 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
Vishwakarma Jayanti 2020
विज्ञापन
आज विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका, जगन्नाथपुरी, भगवान शंकर का त्रिशुल, विष्णु का सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था। माना जाता है कि विश्वकर्मा वास्तु देव के पुत्र हैं। आज पूरे भारत वर्ष में सृजनकर्ता विश्वकर्मा की जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर हम बात कर रहे हैं शहर के ऐसे शिल्पियों की जिन्होंने अपने सृजन को देश व समाज के हित में समर्पित किया है।
विज्ञापन


पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है।विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा
कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र, भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया था। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था।
विज्ञापन


भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के बारे में विचार किया। इसकी जिम्मेदारी शिवजी ने भगवान विश्वकर्मा दी तब भगवान विश्वकर्मा ने सोने के महल को बना दिया। इस महल की पूजा करने के लिए भगवान शिव ने रावण का बुलाया। लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने पूजा के बाद दक्षिणा के रूप में महल ही मांग लिया। भगवान शिव ने महल को रावण को सौंपकर कैलाश पर्वत चले गए।इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर का निर्माण भी किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।

भगवान विश्वकर्मा पूजा विधि
सुबह प्रात:काल भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति की स्थापना कर उनकी पूजा और आराधना की जाती है। निर्माण और मशीनी कारखानों में समस्त औजारों की पूजा करें और प्रसाद का वितरण करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें