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Telugu Hanuman Jayanthi 2021: तेलुगु पंचांग के अनुसार हनुमान जयंती आज, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ

Fri, 04 Jun 2021 01:07 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • तेलुगु पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है हनुमान जयंती
  • 4 जून को कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मनाई जा रही है हनुमान जयंती
  • चैत्र पूर्णिमा और कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भी मनाई जाती है हनुमान जयंती
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Telugu Hanuman Jayanthi 2021 - फोटो : social media
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विस्तार
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Telugu Hanuman Jayanthi 2021 Date: तेलुगु पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के दिन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हनुमान जंयती का पर्व मनाया जा रहा है। यहां ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के अंशाावतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। वे मां अंजनी के लाल और पवन पुत्र हैं। हनुमान जयंती देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथि पर मनाई जाती है। जहां देश के कई राज्यों में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। तो वहीं कुछ राज्यों में यह कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाई जाती है।

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हनुमान जयंती मुहूर्त 
दशमी तिथि प्रारंभ- गुरुवार 3 जून रात्रि 12:26 बजे से
दशमी तिथि समाप्त- शुक्रवाप 4 जून रात्रि 12.28 बजे तक

पूजा विधि

  • हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।
  • हनुमान जी को सरसों का तेल, सिंदूर और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाया जाता है।
  • इस दिन रामायण का भी पाठ करते हैं।
  • हनुमान जी को विशेष भोग लगाएं जाते हैं।
  • इसके अलावा उन्हें चोला भी अर्पित किया जाता है। 
  • अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।


हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय
हनुमान जी को प्रसन्न करने का प्रमुख उपाय है अपने घर में नित्यप्रति राम नाम का गुणगान करते रहना, राम भक्तों की रक्षा करने के लिए हनुमान सदैव तत्पर रहते हैं इन्होने सभी नौ ग्रहों को राक्षस राज रावण से मुक्त कराया था जिसके फलस्वरूप शनि सहित सभी ग्रहों का वरदान है कि, हनुमान भक्त प्राणी को ग्रहों के दोष-मारकेश अथवा मरणतुल्य कष्ट देने वाले ग्रहों की दशादि का दोष नहीं लगेगा। 

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हनुमान जी की पूजा के लाभ
हनुमान जी की आराधना करते रहने पर सभी अशुभग्रह शुभफल देने को विवश हो जाते हैं। इनके अंदर तेज, धृति, यश, चतुरता, शक्ति, विनय, नीति, पुरुषार्थ, उत्तम बुद्धि, शूरता, दक्षता, बल, धैर्य और पराक्रम हमेशा विद्यमान रहते हैं। अतः इनके स्मरण से मनुष्य में बुद्धि, बल, यश, धैर्य निर्भयता, आरोग्यता, विवेक और वाक्पटुता आदि गुण तत्क्षण आ जाते हैं। प्रसन्न होने पर ये आठों सिद्धियों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व और नौ निधियों 'पद्म निधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नन्दनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्वनिधि" इनमें से कुछ भी दे सकते हैं।

मंत्र
हनुमान जी का मंत्र- ऊँ हनुमते नम:। या अष्टादश मंत्र 'ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा। का जप करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से तो मुक्ति मिलती ही है साथ ही घर में, आफिस या दुकान में, शोरूम अथवा किसी भी तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठान में नित्यप्रति इनकी आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा, मरण, मोहन, उच्चाटन, स्तम्भन, विद्वेषण आदि से पूर्णतः मुक्ति मिल जाती है।

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