सूर्य की पूजा का महत्व
ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश होता है। इसलिए बैसाखी के दिन सूर्यदेव और लक्ष्मीनारायण की पूजा करना शुभ होता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। बैसाखी पर सूर्यदेव से जुड़े उपाय करने का भी खास महत्व है। इन उपायों को करने से कुंडली में सूर्य संबंधी शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं।
सत्तू का धार्मिक महत्व
बिहार में बैसाखी को सतुआन कहा जाता है। इस दिन सत्तू खाने की परंपरा है। ज्योतिषीय दृष्टि से चने की सत्तू का संबंध सूर्य, मंगल और गुरु से भी माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि, सूर्य के मेष राशि में आने पर सत्तू और गुड़ खाना चाहिए। इनका दान भी करना फलदायी होता है। ऐसा करने से सूर्य कृपा का लाभ प्राप्त होता है।
ककोलत में स्नान का बड़ा महत्व
बैसाखी के पावन अवसर पर ककोलत जलप्रपात में स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बैसाखी पर इस जल में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है। इस दौरान मेले का आयोजन भी किया जाता है।
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