लोक आस्था का पर्व सिर्फ देश-दुनिया में पूरी निष्ठा और श्रद्धा के किया जाता है। कहते हैं कि इस पूजा के दौरान सच्चे मन से मांगी गई सभी मनौतियां पूरी होती हैं। चार दिनों के छठ महापर्व में आज तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि इस पावन दिन भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से इस जन्म के साथ-साथ, किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
क्यों देते हैं डूबते सूर्य को अर्घ्य
यही कारण है कि सूर्य षष्ठी के व्रत की तैयारी, लोग कई महीने पहले से ही करने लगते हैं। इस पावन पर्व पर अस्त हो रहे सूर्य को पूजन करने के पीछे ध्येय यह भी होता है कि — ‘हे सूर्य देव, आज शाम हम आपको आमंत्रित करते हैं कि कल प्रातःकाल का पूजन आप स्वीकार करें और हमारी मनोकामनाएं पूरी करें।
संध्या अर्घ्य देने का फल
छठ के इस पावन दिन भगवान सूर्य को जल में थोड़ा सा दूध मिलाकर अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य षष्ठी के दिन संध्या के समय भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से सौभाग्य जगता है। सूर्य देवता की कृपा से आरोग्य के साथ लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दिन के तीन प्रहर में सूर्य की साधना विशेष रूप से फलदायी होती है। पहली - प्रातःकाल के समय सूर्य की साधना से आरोग्य की प्राप्ति होती है। दूसरी - दोपहर के समय की साधना साधक को मान-सम्मान में वृद्धि कराती है। तीसरी - संध्या के समय की विशेष रूप से की जाने वाली सूर्य की साधना सौभाग्य को जगाती है और संपन्नता लाती है।