इस माह में सभी शिवभक्तों को शिवाराधन के साथ अपने चिन्तन-मनन व आचरण में शिवतत्त्वों को समाविष्ट करने का प्रयास करना चाहिए। बोलबम् के साथ अपने गुण, कर्मों और स्वभावों में शिवतत्त्वों यानि कल्याणकारी विचारों का ऐसा समावेश करना चाहिए जिससे समूचा जीवन ही शिवमय हो जाए, धन्य बन जाए और श्रावण का व्रताराधन व कावड़ की शिवभावमयी तीर्थयात्रा सबके लिए शुभ यात्रा बन जाए। यह यात्रा मनुष्य मात्र के तथा राष्ट्र के लिए भी कल्याणकारी रूप में प्रस्तुत हो। श्रावणी अमावस्या में शिवाभिषेक करते समय यह शुभ संकल्प भी लें कि हम कल्याणकारी जीवन यात्रा की ओर आगे बढेंगे।
(लेखक- अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं।