इस बार पवित्रा एकादशी के दिन श्रावण का अंतिम सोमवार भी रहेगा। इसलिए यह दिन भगवान नारायण और शिवजी की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण दिन है। पवित्रा एकादशी की कथा का श्रवण एवं पठन करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है, वंश वृद्धि होती है तथा समस्त सुख भोगकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी 2022: पवित्रा एकादशी की कथा का श्रवण एवं पठन करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है, वंश वृद्धि होती है तथा समस्त सुख भोगकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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शास्त्रों में सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या पवित्रा एकादशी बताया गया है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णुजी की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है। इस बार यह एकादशी 8 अगस्त, सोमवार को है। इस बार पवित्रा एकादशी के दिन श्रावण का अंतिम सोमवार भी रहेगा। इसलिए यह दिन भगवान नारायण और शिवजी की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण दिन है।
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व्रत का महत्व-
एकादशी तिथि के महत्व को बताते हुए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है-''मैं वृक्षों में पीपल एवं तिथियों में एकादशी हूँ''। एकादशी की महिमा के विषय में शास्त्र कहते हैं कि विवेक के समान कोई बंधु नहीं और एकादशी के समान कोई व्रत नहीं। पदम् पुराण के अनुसार परमेश्वर श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी तिथि का महत्त्व समझाते हुए कहा है कि बड़े-बड़े यज्ञों से भी मुझे उतनी प्रसन्नता नहीं मिलती जितनी एकादशी व्रत के अनुष्ठान से मिलती है।शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है एवं भगवान विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। संतान प्राप्ति की कामना के लिए इस व्रत को अमोघ माना गया है।इस व्रत को करने वाले भक्तों को न केवल स्वस्थ तथा दीर्घायु संतान प्राप्त होती है बल्कि उनके सभी प्रकार के कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
पूजाविधि-
इस दिन दैहिक,दैविक एवं भौतिक तीन प्रकार के कष्टों को दूर करने वाले भगवान श्री नारायण की उपासना करनी चाहिए। रोली,मोली,पीले चन्दन,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतुफल,मिष्ठान आदि अर्पित कर धूप-दीप से श्री हरि की आरती उतारकर दीप दान करना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' का जप एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत फलदायी है। संतान कामना के लिए इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। योग्य संतान के इच्छुक दंपत्ति प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए। पवित्रा एकादशी की कथा का श्रवण एवं पठन करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है, वंश वृद्धि होती है तथा समस्त सुख भोगकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। जीवन में आए कष्टों के निवारण के लिए इस दिन पीपल के पत्ते पर अंगूठा चूसते हुए बालकृष्ण की पूजा करनी चाहिए।
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पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त
श्रावण पुत्रदा एकादशी, सोमवार 8 अगस्त को है। एकादशी तिथि प्रारंभ 7 अगस्त को सुबह 11: 50 मिनट से शुरू हो चुकी है और 8 अगस्त को रात 9: 00 बजे समापन होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है इसलिए एकादशी का व्रत 8 अगस्त को रखा जाएगा।