Sheetala Ashtami 2021: आज आषाढ़ मास की शीतला अष्टमी है। आज के दिन शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण व्रत होता है। यह व्रत माता शीतला को समर्पित है। माता सीता आरोग्य की देवी हैं और शीतलता प्रदान करती हैं। ये माता दुर्गा का स्वरूप हैं। शास्त्रों में इस व्रत को बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी की पूजा विधि और इस व्रत का महत्व।
माता शीतला की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। साफ-सुथरे नारंगी रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा करने के लिए दो थाली सजाएं। एक थाली में दही, रोटी, पुआ, बाजरा, नमक पारे, मठरी और सतमी के दिन बने मीठे चावल रखें। दूसरी थाली में आटे का दीपक बनाकर रोली, वस्त्र अक्षत, सिक्का और मेहंदी रखें और ठंडे पानी से भरा लोटा रखें। घर के मंदिर में शीतला माता की पूजा करके बिना दीपक जलाए रख दें। थाली में रखा भोग चढ़ाएं और अंत में नीम के पेड़ को जल अर्पित करें।
अर्पित किए जाते हैं बासी पकवान
मां शीतला को एक दिन पूर्व उन्हें भोग लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं। अष्टमी के दिन बासी पकवान ही देवी को नैवेद्ध के रूप में समर्पित किए जाते हैं। लोकमान्यता के अनुसार आज भी अष्टमी के दिन कई घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और सभी भक्त ख़ुशी-ख़ुशी प्रसाद के रूप में बासी भोजन का ही आनंद लेते हैं।
कौन है शीतला माता?
स्कंद पुराण में माता शीतला का वर्णन है, जिसमें उन्हें चेचक जैसे रोगों की देवी बताया गया है। उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया गया है कि माता शीतला अपने हाथों में कलश, सूप, झाडू और नीम के पत्ते धारण किए हुए हैं। वे गर्दभ की सवारी किए हुए हैं। शीतला माता के संग ज्वरासुर ज्वर का दैत्य, हैजे की देवी, चौंसठ रोग, घेंटुकर्ण त्वचा रोग के देवता एवं रक्तवती देवी विराजमान होती हैं। इनके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणुनाशक जल है।
करें ये उपाय
मां की अर्चना का स्त्रोत स्कंद पुराण में शीतलाष्टक के रूप में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्त्रोत की रचना स्वयं भगवान शंकर ने जनकल्याण में की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा का गान करता है,साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है। इस दिन माता को प्रसन्न करने के लिए शीतलाष्टक पढ़ना चाहिए। मां का पौराणिक मंत्र 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' भी प्राणियों को सभी संकटों से मुक्ति दिलाते हुए समाज में मान सम्मान दिलाता है। मां के वंदना मंत्र में भाव व्यक्त किया गया है।