शारदीय नवरात्रि का पवित्र दिन जारी है और आज 28 सितंबर को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। नवरात्रि पर माता के नौ स्वरूपों में हर एक स्वरूप का अपना खास महत्व होता है। इस दिन मां कात्यायनी की पूजा-आराधना होगी। लेकिन इस बार शारदीय नवरात्रि पर तृतीया तिथि दो दिन पड़ने कारण आज नवरात्रि के सातवें दिन मां के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जा रही है। देवी पुराण के अनुसार मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करने से सभी तरह के पापो से मुक्ति मिल जाती है और जीवन में सुख, आनंद और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां कात्यायनी का स्वरूप बहुत ही अद्बभुत है जिसमें माता का स्वर्ण के समान चमकीला वर्ण, सिंह वाहन और चार भुजाओं वाली माँ कात्यायनी अत्यंत तेजस्विनी प्रतीत होती हैं। इनके बाएं हाथ में कमल और तलवार है, वहीं दाहिने हाथ आशीर्वाद और स्वास्तिक मुद्रा से सुशोभित हैं। भगवान कृष्ण को पाने की कामना से व्रज की गोपियों ने इन्हीं की आराधना यमुना (कालिंदी) के तट पर की थी। मां कात्यायनी की नवरात्रि के दिनों में पूजा, तप और आराधना करने से तन कांतिमान होता है और गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है। नवरात्रि पर मां कात्यायनी की पूजा करने के साथ विधि-विधान के साथ आरती जरूर पढ़ना चाहिए। आइए पढ़ते हैं मां कात्यायनी की आरती, मंत्र और स्त्रोत।
मां कात्यायनी ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥
मां कात्यायनी स्तोत्र पाठ
कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
मां कात्यायनी की आरती
जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को 'चमन' पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे
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