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Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि में रोजाना करें मां अंबे की ये आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

Thu, 19 Oct 2023 10:40 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maa Durga Aarti Lyrics Om Jai Ambe Gauri : नवरात्रि के नौ दिनों में मां अंबे की आराधना के साथ ही सुबह-शाम उनकी आरती की जाती है। इसलिए माता रानी को प्रसन्न करने के लिए इन नौ दिन मां जगदंबे की आरती जरूर करें। 
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Maa Durga Aarti Lyrics - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shardiya Navratri 2023: 15 अक्तूबर दिन रविवार से मां जगदंबे की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि शुरू हो चुका है। इस साल शारदीय नवरात्रि 15 अक्तूबर से शुरू होकर 24 अक्तूबर तक रहेगी। 23 अक्तूबर को महानवमी और 24 अक्तूबर को विजयादशमी यानी दशहरा है। नवरात्रि का महापर्व देश भर में काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जा जाती है। मां दुर्गा को सुख, समृद्धि और धन की देवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान उपवास रखने और पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से वो अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं। साथ ही उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इसलिए माता रानी को प्रसन्न करने के लिए इन नौ दिन मां जगदंबे की रोजाना आरती करनी चाहिए। मां दुर्गा की आरती इस प्रकार है -

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मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी

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