हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन और रात अत्यंत पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होकर अमृतवर्षा करते हैं। इस दिन किए गए उपाय घर में सुख-शांति, ऐश्वर्य और लक्ष्मी कृपा सुनिश्चित करते हैं।
1. चंद्रमा को अर्घ्य देना
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को दूध, जल और सफेद पुष्प अर्पित करें। इससे मानसिक शांति, दांपत्य सुख और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। माना जाता है कि चंद्रमा की शीतल किरणों में रखी गई खीर भी अमृत तुल्य होती है और इसे ग्रहण करने से रोग-नाश और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
2. खीर का प्रसाद चांदनी में रखना
इस दिन खीर बनाकर खुले आसमान में बर्तन में रखकर चंद्रमा की रोशनी में रखना चाहिए। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना गया है। इससे परिवार में सुख-शांति और ऐश्वर्य का वास होता है,वही आरोग्य की प्राप्ति होती है।
3. लक्ष्मी पूजन और श्री सूक्त पाठ का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। सफेद पुष्प, चंदन, धूप, दीप और खीर का भोग लगाकर विधिवत पूजन करें। इस अवसर पर श्री सूक्त का पाठ करना विशेष महत्व रखता है।पाठ करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि, सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का स्थायी वास सुनिश्चित होता है। श्रद्धा और विश्वास से श्री सूक्त का पाठ करने से चंद्रमा की कृपा भी प्राप्त होती है और जीवन में ऐश्वर्य व सौभाग्य बढ़ता है।
4. दान करना
शरद पूर्णिमा के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, खीर, चावल या मिठाई दान करें। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान लक्ष्मी को प्रसन्न करता है और घर में समृद्धि व सुख-शांति का संचार करता है।
5. दीपक जलाना
घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीपक जलाना शुभ माना गया है। दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शरद पूर्णिमा पर दीपक जलाने से लक्ष्मी का स्वागत होता है और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
6. मंत्र जाप
इस दिन "ॐ लक्ष्म्यै नमः" या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी है। मंत्र जाप से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।