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Shani Jayanti 2024: कब मनाई जाएगी शनि जयंती ? जानें न्याय के देवता को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

Mon, 13 May 2024 06:27 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Shani Jayanti 2024 - फोटो : अमर उजाला
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Shani Jayanti Upay 2024: सप्ताह में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। इस दिन इनकी पूजा करने से जातक के कष्टों में कमी आती है। साथ ही नौकरी में तरक्की के योग बनते हैं। हालांकि, शनि देव की विशेष कृपा पाने के लिए शनि जयंती का दिन और भी शुभ है। जयंती के पावन अवसर पर शनि देव को सरसों का तेल अवश्य चढ़ाना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। बता दें ज्योतिष में शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। वह व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल देते हैं। इसलिए उन्हें न्यायाधीश का स्थान प्राप्त है।

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इस साल 6 जून 2024 को शनि जयंती मनाई जाएगी। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा के साथ-साथ स्नान और दान करना लाभदायक होता है। इससे जातक को शनि दोष से छुटकारा मिलता है। इस दौरान कुछ खास उपायों को करने से शनि देव का शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकता है। आइए उन उपायों के बारे में जान लेते हैं।

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शनि चालीसा
शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए शनि जयंती पर शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

शिव जी और हनुमान जी की पूजा
शनि जयंती पर शिव जी और हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव जी और हनुमान जी के भक्तों पर शनि देव की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती है।

इन चीजों का करें दान
शनि जयंती पर अपनी श्रद्धा अनुसार दान करना चाहिए। इससे जातक की समस्याओं का निवारण होता है। साथ ही कुंडली से शनि दोष भी कम होने लगता है। इस दौरान जूते, चप्पल, काले रंग का छाता आदि का दान करें।

पीपल के पेड़ की पूजा
शनि जयंती पर शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करें। इस दौरान पेड़ के पास सरसों का तेल वाला पांच दीया जलाएं। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं।

शनिदेव के प्रमुख मंत्र
शनि जयंती पर कुछ मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए इन मंत्रों को जान लेते हैं-

शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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