सावन संकष्टी चतुर्थी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 01 अगस्त की रात को 11 बजकर 07 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 2 अगस्त को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार सावन संकष्टी चतुर्थी 2 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान के साथ होगी जिससे सभी तरह की बाधाएं दूर होंगी।
सावन संकष्टी पूजा का शुभ मुहूर्त
2 अगस्त को सावन संकष्टी चतुर्थी व्रत के लिए पूजा सुबह 7 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसमें पूजा करना बहुत ही शुभ रहेगा। वहीं जो लोग व्यापार में तरक्की चाहते हैं उनके लिए पूजा सुबह 09 बजकर 05 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। पूजा का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त अमृत मुहूर्त सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान गणपति की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और व्रत का संपूर्ण फल मिलता है।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए पूजा घर के सामने चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश जी को रोली-चंदन का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीपक जलाएं। मोदक का भोग लगाएं। पूजा में भगवान को इस दौरान दूर्वा जरूर अर्पित करे। पूजा के अंत में कथा का पाठ और आरती करें। रात को चंद्रमा के निकलने पर जल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
भगवान गणेश को सभी कार्यों की शुरुआत में पूजने की परंपरा है, क्योंकि वे विघ्नों को दूर कर कार्यों को सिद्ध करते हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा करने से जीवन की हर बाधा सरल हो जाती है। इस दिन उन्हें दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करने का विशेष महत्व है। उनका ध्यान और जप करने से व्यक्ति में आत्मबल, विवेक और सकारात्मकता का विकास होता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा का भी विशेष पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन शांत रहता है। चंद्रमा को जल, दूध, अक्षत और पुष्प अर्पित करने से चित्त की स्थिरता बढ़ती है।
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