सावन पूर्णिमा शिव-पार्वती की आराधना
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस माह में हर एक तिथि का विशेष महत्व होता है। सावन पूर्णिमा पर भगवान शिव की विशेष पूजा-आराधना करने का खास महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार सावन पूर्णिमा को भगवान शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करनी बेहद शुभ मानी जाती है। सावन पूर्णिमा के दिन भगवान शिव के शिवलिंग के ऊपर रुद्राभिषेक करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं वहीं, शिवजी पर दूध चढ़ाने से कुंडली में चंद्र दोष मुक्ति मिलती है।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना
सावन पूर्णिमा पर जहां पवित्र नदियों में स्नान का महत्व होता है वहीं इस दिन देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी थी। इसी से प्रसन्न होकर राजा बलि ने वामन रूप में पाताल लोक में मौजूद भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ विदा कर दिया। इसलिए रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन राजा बलि नाम से भी एक राखी भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के चरणों में रखना चाहिए। इससे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख समृद्धि आती है।
हल्दी से बनाएं स्वस्तिक
सावन पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी के आगमन एवं नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और जल का मिश्रण मिलाकर स्वास्तिक जरूर बनाएं।वहीँ मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं,ये शुभ और समृद्धिकारक माना गया है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर आपके घर में धन और धान्य की कमी नहीं होने देंगी।
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सत्यनारायण की कथा सुने
पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की पूजा करने के लिए उत्तम तिथि है। यदि आपके घर में काफी समय से आर्थिक तंगी चल रही है या फिर कारोबार में सफलता नहीं मिल रही है तो प्रत्येक पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने और पूजन करने से आपको विशेष लाभ होगा और आपके घर में धन की वृद्धि होगी। इसके अलावा भी जीवन में कोई भी परेशानी है तो वह भी विष्णुजी की कृपा से दूर हो जाएगी।
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दान करें
हिंदू धर्म में दान करने का विशेष महत्व होता है। सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए इस दिन दान करना बहुत ही शुभ होता है। सावन पूर्णिमा पर अन्न, दूध, फल, चावल आदि का दान करें।
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