फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan 2024: सावन माह में करें शिव चालीसा का पाठ, महादेव सभी इच्छाएं करेंगे पूरी

Fri, 28 Jun 2024 04:06 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
शिव चालीसा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

Sawan 2024: महादेव के प्रिय माह सावन की शुरुआत होने वाली है। यह समय भोलेनाथ की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सावन में आने वाले सभी सोमवार को व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं इस साल श्रावण मास की शुरुआत 22 जुलाई 2024 से होने वाली है, और इसका समापन 19 अगस्त 2024 के दिन होगा। इस दौरान महादेव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसके अलावा ग्रहों के बुरे प्रभाव भी दूर होते हैं। इस दौरान सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए उपवास रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर के लिए यह व्रत करती है।

प्रिय माह होने की वजह से सावन में की गई पूजा का अधिक फल प्राप्त होता है। ऐसे में शिव चालीसा का पाठ जरूर करें, इससे महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव चालीसा का पाठ करने से सभी कष्टों का निवारण होता है और तरक्की के योग बनते हैं। यदि आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो शिव चालीसा का पाठ करें। इसी कड़ी में आइए इससे मिलने वाले लाभ के बारे में भी जान लेते हैं।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

शिव चालीसा के फायदे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन माह में रोजाना 11 बार शिव चालीसा का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती है। साथ ही आर्थिक समस्याओं का भी निवारण होता है। कहते हैं कि यदि किसी बीमारी से परेशान है, तो शिव चालीसा का पाठ करने से स्वास्थ्य में लाभ देखने को मिलता है। इसके अलावा शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यापार और नौकरी में तरक्की मिलती है। यदि आप रोजाना इसका पाठ करती हैं, तो संतान सुख प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। शिव चालीसा का पाठ करने से मन से सभी प्रकार के डर दूर होने लगते है, और व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र हो जाता है।

शिव चालीसा के नियम
शिव चालीसा का पाठ करने से पहले उसके नियमों को जानना बेहद जरूरी है। बता दें इस पाठ को हमेशा ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान के बाद करना चाहिए। इस दौरान अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें। शिव चालीसा का पाठ करने से पहले महादेव के आगे घी का दीपक जलाएं। फिर श्री गणेश श्लोक का जाप करें और बाद में शिव चालीसा का पाठ शुरू करें। 

शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें