सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना गया है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने परिजनों के बीच रहकर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के माध्यम से अर्पित अन्न-जल ग्रहण कर तृप्त होते हैं। पितृपक्ष का समापन आश्विन मास की अमावस्या को होता है। इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है।
इसलिए है ये तिथि खास
इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर विधि-विधान से पितरों का स्मरण करने और जरूरतमंदों की सेवा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे, इसके लिए इस दिन कुछ विशेष कार्य करने की परंपरा है। वहीं कुछ कार्यों को इस दिन वर्जित माना गया है।
ब्राह्मणों को कराएं भोजन
सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मणों को घर आमंत्रित कर श्रद्धापूर्वक भोजन कराने की परंपरा है। भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देकर उनका सम्मानपूर्वक विदा करें। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम माना जाता है।
गाय, कौए और कुत्ते को दें भोजन
पितृपक्ष में पशु-पक्षियों को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन निकालकर उन्हें खिलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इनके माध्यम से पितरों को अन्न अर्पित करने से वे तृप्त होते हैं।
चींटियों को खिलाएं आटा-शक्कर
इस दिन आटे में शक्कर मिलाकर चींटियों को खिलाने की परंपरा भी है। इसे जीव सेवा का पुण्य कार्य माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं।
ईशान कोण में जलाएं घी का दीपक
संध्या के समय घर के पूजा स्थल अथवा ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय पितरों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें। मान्यता के अनुसार इससे घर में सकारात्मकता और सुख-शांति का वातावरण बना रहता है।
इन कार्यों से बनाएं दूरी
खाली हाथ न लौटाएं
सर्वपितृ अमावस्या पर यदि कोई व्यक्ति आपके घर दान या दक्षिणा लेने आता है तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसका सहयोग करें। इसी तरह कोई भूखा व्यक्ति भोजन मांगने आए तो उसे निराश न करें। उसे भोजन कराएं अथवा अपनी क्षमता के अनुसार चावल, आटा या अन्य खाद्य सामग्री का दान करें।
मांस-मदिरा से रहें दूर
पितृपक्ष को सात्विक आचरण और संयम का समय माना जाता है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण रखना उचित माना जाता है।
बाल और नाखून काटने से बचें
सर्वपितृ अमावस्या पर बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह इस दिन दाढ़ी बनाने से भी बचने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में ऐसे कार्यों से दूरी रखना चाहिए।
किसी का अपमान न करें
इस दिन अपने व्यवहार में विशेष रूप से संयम रखें। किसी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार न करें और घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें। मान्यता है कि पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों के साथ सदाचार और विनम्रता का पालन भी जरूरी है।